What are the Legal Tenant Rights in India :किराएदारों को हाईकोर्ट ने दिया तगड़ा झटका, मकान मालिक फैसला सुन हो जाएंगे खुश
आमतौर से किराए के परिसर के लिए मकान मालिक और किराएदारों के झगड़ा होना आम बात है. कोर्ट और कचहरी में मकान मालिक और किराएदार के झगड़ों के मुकदमा की भरमार है.
इससे संबंधित पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab Haryana High Court) ने मकान मालिकों के हक में बड़ा फैसला सुनाया है.
इस फैसले से किराएदारों को बहुत तगड़ा झटका भी लगा है. High court के इस फैसले को जानने के बाद अब किराएदार (What Are The Legal tenant landlord rights In India) अपनी मनमानी नहीं कर सकेंगे.
What Are The Legal tenant landlord rights In India :
अगर आप किसी संपत्ति के मालिक हैं और उस संपत्ति को आपने किराए पर दे रखा है, और आप किरायेदार से परेशान है, तो यह खबर आपको बहुत ज्यादा खुश कर देगी.
एक केस का निपटारा करते हुए हाई कोर्ट ने मकान मालिकों के मौलिक अधिकारों (landlord’s property rights) को मजबूत प्रदान करते हुए किरायेदारों को करारा झटका दिया है.
अब किराएदार किराए को लेकर या उस परिसर को खाली नहीं करने को लेकर अपनी मनमानी नहीं कर पाएंगे, और उनके इस मनमाने रवैया पर लगाम लगेगी, अंकुश लगेगा.
पंजाब हरियाणा हाइकोर्ट ने यह फैसला एक मकान मालिक की ओर से किराएदार (kirayedar ke adhikar) के खिलाफ दर्ज किए गए एक मामले की सुनवाई करते हुए दिया है. किराएदार और मकान मालिक के झगड़े (What are the Legal Tenant Rights in India) से संबंधित यह वीडियो आप हमारे यूट्यूब चैनल पर जाकर देख सकते हैं.
What is the new tenant rule in India?
एक मामले की सुनवाई करते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट (Punjab and Haryana High Court) ने किराएदार को यह कहा कि किराएदार मकान मालिक (makan malik ke adhikar) की ओर से अपनी संपत्ति खाली करने के बताए गए सही कारण की वजह से उसकी प्रोपर्टी को खाली करे.
क्योंकि मकान मालिक को यह अधिकार है कि वह अपनी प्रॉपर्टी को अपनी जरूरत के समय इस्तेमाल कर सकता है, और उसकी जरूरत के समय किराएदार उस प्रॉपर्टी को खाली करने से मना नहीं कर सकता.और यह किराएदार को तय करने का अधिकार नहीं है कि,मकान मालिक को उस संपत्ति की जरूरत है या नहीं.
मकान मालिक किरायेदार को कारण बताने के लिए बाध्य नहीं है-What is the protection of tenants?
सम्पत्ति की आवश्यकता होने पर मकान मालिक अपनी मर्जी के अनुसार अपनी प्रोपर्टी या मकान (property rights) को खाली करवा सकता है.
इस मामले में माननीय न्यायाधीश ने यह भी कहा कि संपत्ति खाली करवाने के लिए प्रॉपर्टी मालिक किराएदार ( What are the Legal Tenant Rights in India) को कोई कारण बताने के लिए बाध्य नहीं है.
किराएदार को माननी होगी यह बात (Can a tenant claim ownership in India?)-
किराएदार और प्रोपर्टी मालिक (property owner rights) के अपने अपने हक हैं. मकान मालिक के द्वारा अपनी संपत्ति के लिए किए गए मालिकाना दावे को टाला नहीं जा सकता.
अगर प्रॉपर्टी मालिक अपनी प्रोपर्टी (property ke adhikar) को खाली कराने लिए कोई वाजिब कारण देता है,तो किराएदार को वह कारण हर हाल में मानने के लिए बाध्य होना पड़ेगा.
अगर संपत्ति के मालिक को अपनी प्रॉपर्टी की वाजिब आवश्यकता है, और वह अपने किराएदार से उस प्रॉपर्टी को खाली करवाना चाहता है, तो वह किराएदार से प्रॉपर्टी (property news) खाली करने के लिए कभी भी कह सकता है, और ऐसे में किराएदार को उस प्रोपर्टी या मकान को खाली करना ही होगा.
How do you protect against bad tenants–किराएदार नहीं कर सकता मनमानी-
कोई भी किराएदार अपनी मनमानी करते हुए यह बहाना नहीं कर सकता कि मकान मालिक अमीर है और उसके पास अन्य प्रॉपर्टी भी है इसलिए उसको इस प्रॉपर्टी की जरूरत नहीं है.
अगर मकान मालिक कोई कानूनन नियम (property rights in law)का उल्लंघन करता है तो ही किराएदार की बात पर विचार हो सकता है। इसके लिए वाजिब कारण होना चाहिए। मामले के अनुसार लुधियाना के दो किराएदारों ने कोर्ट में रिट दायर की थी। हाई कोर्ट (High Court News) ने इस मामले में सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता के इस तर्क को खारिज कर दिया।
What are the Legal Land lord Rights in India :मकान मालिक का है ये अधिकार-
एक मकान मालिक को कानून में अपनी प्रोपर्टी (property news) को खाली करवाने के लिए कई तरह के कानूनी अधिकार भी दिए गए हैं.
वह कभी भी किसी भी परिस्थिति या जरूरत में किराएदार से मकान खाली करने के लिए कह सकता है. और इसको किरायेदार को हर हाल में मानने के लिए बाध्य होना पड़ेगा.
मकान मालिक किराएदार (makan malik ke hak) को इसके लिए कुछ भी उचित कारण बता सकता है.और किराएदार इस पर किसी भी तरह का कोई सवाल खड़ा नहीं कर सकता है.
Can a landlord evict a tenant forcefully?
इस केस में किरायेदार ने दायर अपनी याचिका में कहा था कि मकान मालकिन अब काफी उम्रदराज हो गई है, और वह किसी व्यवसाय करने के योग्य नहीं है,इसलिए उसको किरायेदार के कब्जे की दुकान की जरूरत नहीं है.
What is the High Court decision on tenants?
हाई कोर्ट (HC decision on property) ने किराएदार के इस तर्क को खारिज करते हुए मकान मालिक के उस तर्क को सही माना जो दुकान खाली कराने के लिए उसने दिया था.
जानिए मकान मालिक और किराएदार के बीच क्या मामला था-
किरायेदार और मकान मालिक के विवाद (property dispute) से जुड़ा यह मामला high court के पास आज से करीब 30 साल पहले पेश हुआ था.
एक किराएदार को मकान मालिक के द्वारा 700 रुपए प्रतिमाह के हिसाब से 1995 में आजीविका के लिए दुकान किराए (tenancy new rules) पर दी थी.
कुछ साल बाद 2010 में मनमानी करते हुए किराएदार ने उस दुकान का किराया दुकान मालिक को देने से मना कर दिया तो दुकान मालिक ने उसको दुकान खाली करने के लिए बोल दिया और किराएदार ने (kirayedari kanoon) अपनी मनमानी दिखाते हुए उस दुकान को खाली करने से मना कर दिया.
इसके बाद दुकान मालिक ने तंग और परेशान होकर हाई कोर्ट जाने का फैसला किया.
F & Q
Can a landlord increase rent after 1 year?
Yes, landlords can increase rent after one year
What is the protection of tenants?
The legislation seeks to protect tenants from arbitrary eviction while allowing landlords to reclaim their property on legitimate grounds
How much rent increase is legal in India?
As there is no specific law regarding an upper limit on the rent, landlords can constantly raise the rent as per their choice.
What is the 12 year tenant rule in India?
In terms of adverse possession, the period is defined to be 12 years. According to the Indian legal system, if a property owner fails to make a claim towards their property for 12 years, and the same tenant continues to occupy the property for 12 years, the ownership rights to the property is transferred to the tenant.
What are the rights of tenants after 50 years in India?
In India, tenants who have lived in a property for a long time, such as 50 years, are protected from arbitrary eviction.
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