हिन्दू महिला की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति में किसका अधिकार होता है 

हिन्दू सक्सेशन एक्ट  की सेक्शन १४ के अनुसार जब भी कोई सम्पत्ती हिन्दु महिला को मिलती है तो वह उसकी वास्तविक मालिक बन जाती है. 

और वह अपनी सारी  प्रॉपर्टी को किसी भी व्यक्ति को स्वेच्छा से ट्रांसफर कर सकती है 

और वह अपनी सारी  प्रॉपर्टी को किसी भी व्यक्ति को स्वेच्छा से ट्रांसफर कर सकती है 

हिन्दू सक्सेशन एक्ट 2005 में संशोधन के बाद लड़कियों को भी लड़कों के बराबर पैतृक संपत्ति में अधिकार दिया जाने लगा 

और इसके साथ ही एक महिला का अपने पति की प्रॉपर्टी में भी अधिकार होता है,जैसे ही पति की मृत्यु होती है पत्नी उस संपत्ति की मालिक बन जाती है 

अगर हिन्दू महिला की मृत्यु हो जाती है और उसने कोई विल या ट्रांसफर डीड नहीं बनाई है तो उसकी संपत्ति उसके पुत्र ,पुत्री और पति में बंट जाती है 

अगर उस महिला के पुत्र,पुत्री और पति नहीं है तो उसकी संपत्ति उसके पति के उत्तराधिकारियों में बंट जाएगी 

अगर महिला शादी शुदा नहीं है तो उसकी संपत्ति उसके माता पिता को मिलेगी 

अगर महिला शादी शुदा नहीं है तो उसकी संपत्ति उसके माता पिता को मिलेगी 

अगर उसके माता  पिता भी जीवित नहीं है और शादीशुदा भी नहीं है तो उसकी संपत्ति उसके पिता के उत्तराधिकारी को मिलेगी 

और अगर उस महिला के फादर के कोई उत्तराधिकारी नहीं है तो फिर उसकी संपत्ति उसके मदर के उत्तराधिकारी को मिलेगी 

हिन्दू महिला की संपत्ति का बटवारा करते समय यह देखा जाता है की उसको वो संपत्ति पिता के द्वारा मिली या सास ससुर के द्वारा मिली