Senior Citizens Act: संपत्ति प्राप्त करने के बाद संतान या रिश्तेदार नहीं कर रहे देखभाल तो आप वापस ले सकते हैं अपनी संपत्ति

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Senior Citizens Act: संपत्ति प्राप्त करने के बाद संतान या रिश्तेदार नहीं कर रहे देखभाल तो आप वापस ले सकते हैं अपनी संपत्ति

सीनियर सिटीजन की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने किस प्रकार से Great Laws For Senior Citizens, New Laws For Senior Citizens,Senior Citizens Protection Laws बनाए हैं.

Great Laws For Senior Citizens, New Laws For Senior Citizens,Senior Citizens Protection Laws

उनको क्या-क्या ऐसी हेल्प दी गई है, जिसके तहत वह अपने अधिकार का इस्तेमाल करके अपनी आजीविका को अपने आखिरी क्षणों को या अपने बुढ़ापे के जीवन को किस प्रकार अच्छे तरीके से व्यतीत कर सकते हैं.

सीनियर सिटीजन को कि सहायता के लिए कैसे कानून बनाए गए हैं ?(What Is Great Laws For Senior Citizens) 

इससे संबंधित वीडियो आप हमारे यूट्यूब चैनल पर देख सकते है

समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट सीनियर सिटीजन के लिए Great Laws For Senior Citizens, New Laws For Senior Citizens,Senior Citizens Protection Laws आदि नए-नए कानून पारित करते रहते हैं.

उनकी मदद के लिए ऐसे-ऐसे नए कानून लाते रहते हैं ताकि उनकी सुरक्षा हो सके और उनकी देखभाल उनका मेंटेनेंस उनके परिवार वाले अच्छे तरीके से कर पाएं.

इसके लिए उनको एक प्रोटेक्शन दिया गया है उनकी कानून के तहत सहायता की गई है ताकि उनको भरण पोषण में या किसी तरह की कोई समस्या नहीं आए.

क्या हैं सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के दिशा निर्देश

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सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कुछ ऐसे दिशा निर्देश होते हैं, जिनके तहत सीनियर सिटीजन अपने अधिकार का इस्तेमाल समय-समय पर वक्त पड़ने पर कर सकते हैं,और सीनियर सिटीजन के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के द्वारा यह पारित किए गए कानून बहुत ज्यादा मदद करने वाले यह कानून होते हैं.

वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए कानून क्या है?

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 को 29 दिसंबर, 2007 को अधिनियमित किया गया था, ताकि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवश्यकता आधारित भरण-पोषण तथा उनके कल्याण को सुनिश्चित किया जा सके.

बेदखली का अधिकार (Right To Eviction)

सेल्फ प्रोटेक्शन के तहत सीनियर सिटीजन के लिए जो पहला कानून Great Laws For Senior Citizens, New Laws For Senior Citizens,Senior Citizens Protection Laws बनाया गया है उसमें सीनियर सिटीजन को ऐसे अधिकार दिए गए हैं, कि अगर उनका बेटा या बेटी उनको तंग करते हो,परेशान करते हो तो, सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत (Right To Eviction) का अधिकार दिया गया और इसके अंतर्गत वह अपने बेटे या बेटी को अपने घर से बेदखल कर सकते हैं.

भरण पोषण का अधिकार (Right To Maintainence)

सीनियर सिटीजन को जो दूसरे कानून के तहत हेल्प मिली हुई है वो है राइट टू मेंटेनेंस( Right To Maintainence) यानी कि भरण पोषण का अधिकार, इस एक्ट में यह बताया गया है कि सीनियर सिटीजन अपना भरण पोषण करने में सक्षम नहीं है,बुजुर्ग होने की वजह से वो अपनी आजीविका को नहीं चला सकते हैं, उनकी आय का कोई स्रोत नहीं है, कोई जरिया नहीं है ,और अक्षम और बीमार होने की वजह से वह किसी भी काम को करने में सक्षम नहीं है,ऐसे में उनके खाने पीने का या आजीविका का कोई भी साधन नहीं है,तो ऐसी कंडीशन में राइट टू मेंटेनेंस (Right To Maintainence) का कानून सीनियर सिटीजन के लिए बहुत ज्यादा हेल्पफुल और काम का होने वाला है.

तो ऐसे में जो बेटा या बेटी या रिश्तेदार उन बूढ़े मां-बाप की हेल्प नहीं करते, इस कानून के तहत यानी राइट ऑफ मेंटेनेंस के तहत वो बुजुर्ग माता-पिता या वो बुजुर्ग सीनियर सिटीजन उन बच्चों से जो कमाई करने में सक्षम है उनसे भरण पोषण का दावा कर सकते हैं.

सीनियर सिटीजन एक्ट के अतिरिक्त और क्या अधिकार हैं?

यहां पर एक बात यह ध्यान देने योग्य है कि सीनियर सिटीजन को एक अधिकार और मिला हुआ है, एक कानून के तहत और यह सीनियर सिटीजन एक्ट के अलावा है यानी कि सीनियर सिटीजन एक्ट उनको एक बोनस के तौर पर मिला हुआ है.

इसके अलावा वह सीआरपीसी (CRPC) या जो अभी नया कानून बना है, बीएनएनएस (BNNS),इस कानून के तहत कार्यवाही कर सकते हैं.

इसमें भी वह अपने बच्चों से मेंटेनेंस क्लेम कर सकते हैं,और वह सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत भी कर सकते हैं और सीआरपीसी यानी कि बीएनएनएस के तहत भी कर सकते हैं, और इन एक्ट के तहत वह अपने बच्चों से भरण पोषण की डिमांड कर सकते हैं.

सीनियर सिटीजन को दोहरा लाभ दिया गया है, सामान्य धाराओं में, सामान्य कानून के तहत भरण पोषण की मांग कर सकते हैं, वहीं सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत भी वो ऐसा कर सकते हैं और इन दोनों ही कानूनों में उनको यह अधिकार दिया गया है.

शिकायत करने का अधिकार ( Right To Complaint )

सीनियर सिटीजन के लिए जो तीसरा कानून है वो है राइट टू कंप्लेंट ( Right To Complaint ) करने का यानी कि सीनियर सिटीजन कंप्लेंट कर सकते हैं,अपने पुत्र,पुत्री या रिश्तेदार की जो उनको प्रताड़ित करते हैं,गाली गलोज करते हैं, मारपीट करते हैं या उनको अपमानित करते हैं.

सीनियर सिटीजन तंग आकर ऐसे पुत्र या पुत्री के खिलाफ कंप्लेंट कर सकते हैं, उनके ऊपर एफआईआर तक दर्ज करवा सकते हैं.

संपत्ति की सुरक्षा का अधिकार (Right To Protect Property)

अब हम बात करेंगे कि संपत्ति की सुरक्षा का अधिकार क्या है? यह सीनियर सिटीजन की हेल्प के लिए बनाया गया है और वो कानून है प्रॉपर्टी से संबंधित जो कि उनकी संपत्ति की सुरक्षा के लिए बनाया गया है.

और यह कानून इसलिए बनाया गया है कि अगर उनसे कोई गलती हो जाए, तो उनकी संपत्ति को किसी भी तरह की कोई आंच ना आए.

इस कानून में यह बताया गया है कि कोई भी सीनियर सिटीजन बूढ़े मां-बाप प्रेम के वशीभूत होकर, बच्चों के प्यार और मोह में फंसकर अपनी संपत्ति को उस बेटा या बेटी या किसी भी रिश्तेदार को गिफ्ट कर देते हैं और बाद में खुद कहीं के नहीं रहते.

सीनियर सिटीजन किस धारा के तहत अपनी संपत्ति वापस पा सकते हैं ? यानी वरिष्ठ नागरिक अधिनियम की धारा 22 क्या है?

सीनियर सिटीजन किस धारा के तहत अपनी संपत्ति वापस पा सकते हैं ? यानी वरिष्ठ नागरिक अधिनियम की धारा 22 क्या है?

एमडब्ल्यूपीएससी अधिनियम, 2007 की धारा 22 के अनुसार राज्य सरकार इस अधिनियम के प्रावधानों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट को शक्तियां और कर्तव्य प्रदान करती है

सीनियर सिटीजन एक्ट में इस धारा के तहत सीनियर सिटीजन को अपनी संपत्ति को वापस लेने का अधिकार दिया गया है.

जो संपत्ति उन्होंने अपने पुत्र के नाम गिफ्ट कर दी थी या ट्रांसफर डीड बनवा दी थी उसको कैंसिल भी किया जा सकता है और वह संपत्ति उन बूढ़े मां-बाप को वापस दिलाई जा सकती है.

लेकिन इसमें बूढ़े मां-बाप को यह ध्यान रखना चाहिए कि आप जिस संपत्ति की गिफ्ट डीड बनाते हैं या उसको टाइप करवाते हैं तो आपको उसमें एक क्लॉज और एक कंडीशन मेंशन करनी होगी, एक शर्त डालनी होगी, और वो शर्त यह है कि यह संपत्ति मैं अपने बेटा या बेटी को प्रेम के वशीभूत होकर दे रहा हूं, और अगर मेरा बेटा या बेटी बुढ़ापे में मेरा ख्याल नहीं रखेंगे, मेरी सेवा नहीं करेंगे तो मैं अगर उनसे नाखुश हूं तो उस संपत्ति को मैं वापस प्राप्त कर सकता हूं.

सीनियर सिटीजन को किसी भी प्रॉपर्टी को गिफ्ट या हस्तांतरण करते समय इस इस बात की सावधानी रखनी पड़ेगी कि वह किसी भी प्रॉपर्टी को देते समय, उसमें यह कंडीशन जरूर मेंशन कर दें ताकि भविष्य में अगर उनको कोई तकलीफ आए शिकायत हो तो वो इस क्लोज की सहायता लेकर उस प्रॉपर्टी के गिफ्ट डीड को या ट्रांसफर डीड को कैंसिल करवा सके.

अब सवाल ये आता है कि सीनियर सिटीजन को यह पता नहीं होता है कि अपनी संपत्ति को वो वापस कैसे प्राप्त करें, उसका प्रोसेस क्या है, इसका तरीका क्या है और इसके बारे में कानून क्या कहता है ?

वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत शिकायत कैसे दर्ज करें?
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वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत शिकायत कैसे दर्ज करें?

एक हेल्पलाइन नंबर 1291 है, जिस पर कॉल करके वरिष्ठ नागरिक अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं

दूसरा तरीका यह है कि इसके लिए एक सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल बना हुआ है, या फिर आप SDM court में जाकर एक एप्लीकेशन दे सकते हैं.

वहां पर आपने जो प्रॉपर्टी गिफ्ट की थी उसकी कॉपी दे सकते हैं, उस क्लोज का हवाला दे सकते हैं,कि मेरा बेटा या पुत्री या रिश्तेदार मेरी सेवा नहीं करते, मेरी सहायता नहीं करते, मेरी मेडिकल में मदद नहीं करते, या मेरे भरण पोषण का इंतजाम नहीं करते,इसलिए इस दी हुई संपत्ति को मैं वापस प्राप्त करना चाहता हूं,और इस संपत्ति को मेरे पुत्र और पुत्री से मुझे वापस दिलवाया जाए.

वरिष्ठ नागरिक को परेशान करने की सजा क्या है?

तीन से छह महीने तक की सजा, या 10,000 रुपए तक का जुर्माना, या दोनों।

तो यह बात आप जब एसडीएम या सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल को बताएंगे तो वह आपके हक में इसका फैसला कर देंगे, और वह प्रॉपर्टी जो कि आपने प्रेम के वशीभूत होकर अपने बच्चों के नाम से गिफ्ट कर दी थी, उस संपत्ति को आपको वापस दिलवाने का आर्डर दे देंगे.

तो सीनियर सिटीजन के लिए यह तीन कानून है और चौथा उनकी संपत्ति से रिलेटेड कानून है कि वो अपनी किसी भी संपत्ति को प्रेम के वशीभूत होकर ऐसे ही किसी को भी ना लुटा दें.

लेखक की 23 Years Experience के आधार पर राय

और मेरा पर्सनल आग्रह सीनियर सिटीजन से यह रहेगा कि वो अपने जीते जी किसी भी तरह की संपत्ति को किसी को भी ना तो दान करें, ना गिफ्ट करें या ना किसी को हस्तांतरण करें, अपने जीते जी अपने कब्जे में रखें और अगर किसी को देना ही चाहते हैं तो फिर उसके नाम से एक वसीयत करके अपने पास रख ले, और उस व्यक्ति को यह बता भी दें कि मैंने तेरे नाम से यह वसीयत करके मेरे पास रखी हुई है.

ताकि वो लालच के वशीभूत होकर सीनियर सिटीजन की हेल्प करेंगे, मदद करेंगे, उनके खाने पीने का ध्यान भी रखेंगे,उनको यह लालच रहेगा कि उनके मरण उपरांत वो संपत्ति उनको मिलने वाली है.

लेकिन जीते जी अगर आपने अपने अधिकार उन बच्चों को दे दिए तो एक बार मुफ्त में जो कोई चीज मिल जाती है,तो उसकी कीमत का एहसास किसी को नहीं रहता.क्योंकि पसीने से जो संपत्ति बनाई जाती है उसका एहसास अलग ही होता है.

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