Rights Of Grandson In Grandfather’s Property–दादा की संपत्ति में पोते का अधिकार,सुप्रीम कोर्ट का फैसला

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Rights Of Grandson In Grandfather’s Property–दादा की संपत्ति में पोते का अधिकार,सुप्रीम कोर्ट का फैसला

हमारे समाज में अक्सर यह कहा जाता है कि दादा की संपत्ति में पोते का अधिकार (Rights Of Grandson In Grandfather’s Property) है.

इसका जवाब यही है कि हां, पोते का दादा की संपत्ति में अधिकार (Rights Of Grandson In Grandfather’s Property) होता है, लेकिन यह किन परिस्थितियों में होता है, पोता (Grandson) अपने दादा (Grandfather) की प्रॉपर्टी में अपना अधिकार (Property Rights) क्लेम कब कर पाएगा,इसके लिए कानून क्या कहता है, इस बात को हमें समझने की जरूरत है.

हमारे देश के कई न्यायालयों में पोते के द्वारा अपने दादा की संपत्ति में उनके जीवन काल के बाद अधिकार (Property Rights) को लेकर क्लेम किया गया है.

उत्तम सिंह वर्सेस सौभाग सिंह केस में क्या था

दादा की संपत्ति में पोते के अधिकार (Rights Of Grandson In Grandfather’s Property) को लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक बहुत ही मशहूर केस 02 मार्च 2016 में आया था, जो की उत्तम सिंह वर्सेस सौभाग सिंह नाम के टाइटल के साथ जारी किया गया था.

उत्तम सिंह वर्सेस सौभाग सिंह सुप्रीम कोर्ट का काफी इंपॉर्टेंट जजमेंट है जो हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) पर इस भ्रम को दूर करता है, या ऐसे कहे कि कानूनी स्थिति को स्पष्ट करता है.

तो आज के इस लेख में हम माननीय सुप्रीम कोर्ट के इसी जजमेंट के आधार पर यह समझने की कोशिश करेंगे की पोते का दादा की संपत्ति (Rights Of Grandson In Grandfather’s Property) में किस प्रकार अधिकार होता है, या फिर नहीं होता है.

क्या थी केस की हिस्ट्री

इस केस के मुख्य फेक्ट की बात करें तो यह केस उत्तम सिंह नाम के एक व्यक्ति ने दायर किया था, जो की संपत्ति के बंटवारे (Partition of property) को लेकर किया गया था.

इस केस में उत्तम सिंह का यह कहना था कि उसके दादा जगन्नाथ सिंह जी की मृत्यु 1973 में हो गई थी और उस वक्त उनके उत्तराधिकारियों में जगन्नाथ जी की पत्नी और चार पुत्र मौजूद थे.

इसके बाद जगन्नाथ सिंह जी की पत्नी की भी मृत्यु हो जाती है, और उनकी मृत्यु के बाद उनके चारों पुत्रों में उनकी संपत्ति का बंटवारा (Partition of property) हुआ और प्रत्येक को 1/4, 1/4 हिस्सा प्राप्त हुआ.

इस संपत्ति में वादी के पिता को प्राप्त हुआ 1/4 हिस्से में से वादी ने अपने 1/8 हिस्से के पार्टीशन क्लेम के लिए और, उसके बंटवारे के लिए कोर्ट में आवेदन किया था.

उत्तम सिंह का यह दावा ट्रायल कोर्ट और फिर हाई कोर्ट में खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के सामने पहुंचा.

सुप्रीम कोर्ट में केस की स्थिति

यहां पर सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य रूप से तीन प्रश्न थे जिन पर कोर्ट ने गौर किया.

  1. दादा की प्रॉपर्टी का टाइटल अभी भी ज्वाइंट प्रॉपर्टी (Ancestral Property) के रूप में था.
  2. उत्तम सिंह उस प्रॉपर्टी का coparshner था इसलिए क्या उस आधार पर उसको कोई अधिकार प्राप्त था.
  3. क्या उत्तम सिंह अपने पिता के जीवित रहते अपने दादा की संपत्ति में अधिकार (Rights Of Grandson In Grandfather’s Property) हासिल करने के लिए क्लेम कर सकता था.
एक पोता दादा की संपत्ति में किन परिस्थितियों में अपने हक और अधिकार के लिए क्लेम कर सकता हैRights Of Grandson In Grandfather's Property–दादा की संपत्ति में पोते का अधिकार,सुप्रीम कोर्ट का फैसला

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) में यह कहा गया है कि किसी हिंदू पुरुष की मृत्यु होती है तो उसकी मृत्यु के समय पर उसके क्लास वन के उत्तराधिकारी पहले देखे जाएंगे, जिसमें मुख्य रूप से उस व्यक्ति की विधवा पत्नी, उसकी माताजी और उसके पुत्र और पुत्रियां आती है.

A class उत्तराधिकारी कौन होते हैं

किसी मृत व्यक्ति के परिवार में उसकी मृत्यु के बाद एक पुत्र, एक पुत्री, उसकी विधवा पत्नी और उसकी माताजी है.

इन सभी लोगों को प्रॉपर्टी के मालिक की मृत्यु होने के बाद वह संपत्ति बराबर बराबर आपस में आराम से मिल सकती है, इसमें किसी भी प्रकार की कोई रुकावट नहीं है,क्योंकि यह सब A class उत्तराधिकारी हैं.

किनका दादा की संपत्ति में अधिकार नहीं बनताRights Of Grandson In Grandfather's Property–दादा की संपत्ति में पोते का अधिकार,सुप्रीम कोर्ट का फैसला

पोता, पोती, नाती, नातिन,पुत्रवधू ,प्रपौत्र, प्रपौत्री, पोते की विधवा, नातिन का पुत्र ,नातिन की पुत्री, नाती की पुत्री या पोती की पुत्री यह तमाम उस वक्त तक उस संपत्ति में अपना हिस्सा नहीं ले सकते, जब तक कि उनके पिता की मृत्यु संपत्ति के मालिक की मृत्यु से पहले ना हो जाए.

यह सभी लोग क्लास वन के लीगल हायर की कैटेगरी में है और संपत्ति में अधिकार पाने के लिए जरूरी है कि उनकी पीढ़ी के अग्रज की मृत्यु हो चुकी हो.

इसका मतलब कि अगर मरने वाले व्यक्ति के पुत्र और पुत्री स्वयं मौजूद हैं, तो मरने वाले व्यक्ति की एक्वायर की हुई प्रॉपर्टी में हिस्सा वह स्वयं ही प्राप्त करेंगे, और उनके आगे की पीढ़ी को कोई अधिकार नहीं होगा.

इसका साफ-साफ मतलब यह है कि किसी भी मरने वाले की प्रॉपर्टी उसके पोते को उस स्थिति में मिलेगी, जब मरने वाले व्यक्ति के बेटे की मृत्यु उस व्यक्ति की मृत्यु से पहले हो चुकी हो.

एक उदाहरण से समझते हैं

संपत्ति का मालिक व्यक्ति A है जो की जिसकी मृत्यु हो चुकी है, और उसकी मृत्यु होने के बाद उसके परिवार में उसके वारिस के तौर पर B पुत्र, C दूसरा पुत्र, D पुत्री और E पत्नी है.

इसमें B पुत्र और C पुत्र की शादी हो चुकी है, और B के दो पुत्र हैं, जिनको हम F और G के तौर पर जानेंगे,वहीं C के भी दो पुत्र हैं, जिनको हम H और I के तौर पर जानेंगे.

यह जो मृतक व्यक्ति A है वह पहली पीढ़ी कहलायेगा, और दूसरी पीढ़ी के तौर पर उसके पुत्र B, पुत्र C, पुत्री D और पत्नी E कहलाएंगे.

और अगर तीसरी पीढ़ी की बात करें तो F,G,H और I यह सब तीसरी पीढ़ी कहलाएंगे.

अब हमारे सामने दो परिस्थितियों पैदा होती है.

1. इसमें अगर A की मृत्यु हो जाती है, तो उसकी मृत्यु के बाद उसकी तमाम संपत्ति उसके चारों वारिश उसके दोनों पुत्रों पुत्री और उसकी पत्नी में बराबर बराबर 1/4–1/4 बंट जाएगी.

और इन चार वारिसों के जिंदा रहने तक इनके बाद की जो तीसरी पीढ़ी है, उनको मृतक A की संपत्ति में से कुछ भी नहीं मिलेगा.

2. संपत्ति के मालिक A की मृत्यु हो जाती है, लेकिन उसकी मृत्यु होने से पहले उसके वारिस पुत्र की मृत्यु भी हो जाती है.

मतलब कि जब मृतक A की मृत्यु हुई तब उसकी मृत्यु से पहले उसके वारिस भी की मृत्यु हो चुकी थी, तो ऐसी स्थिति में मृतक A की मृत्यु होने के बाद उस संपत्ति के चार हिस्से होंगे, जिसमें से B के हिस्से के दो टुकड़े होकर उसके पुत्र और पुत्री को मिल जाएंगे.

मतलब यह है कि A की मृत्यु से पहले अगर B की मृत्यु हो गई है, तो A की मृत्यु के बाद B का जो हिस्सा है, वह उसके पुत्र F और G को बराबर बराबर बांटा जाएगा, और बाकी का हिस्सा C,D और I में बांटा जाएगा.

क्या एक पोता दादा की मृत्यु होने के बाद अपने पिता के जीवित रहते दादा की संपत्ति में अधिकार (Rights Of Grandson In Grandfather’s Property) के लिए क्लेम कर सकता है

इसका जवाब है कि एक पोता दादा की मृत्यु होने के बाद अपने पिता के जीवित रहते दादा की संपत्ति में अधिकार (Rights Of Grandson In Grandfather’s Property) के लिए क्लेम नहीं कर सकता है.

क्योंकि दादा की संपत्ति उसके पुत्र को मिलती है, और पुत्र की मृत्यु के बाद वह संपत्ति पोते को मिलती है, इसलिए पोता डायरेक्ट दादा की संपत्ति में पिता के जीवित रहते क्लेम नहीं कर सकता है.

लेकिन दादा की मृत्यु होने से पहले अगर उसके पिता की मृत्यु हो गई है तो पिता का हिस्सा उस पोते को मिल जाता है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर क्या कहा

उत्तम सिंह वर्सेस सौभाग सिंह वाले मैटर में भी माननीय सुप्रीम कोर्ट ने यही निर्धारित किया कि, दादा की प्रॉपर्टी में पोते को अधिकार (Rights Of Grandson In Grandfather’s Property) तभी मिलेगा जब क्लेम करने वाले पोते के पिता की डेथ उसके दादा के जीवन काल में हो चुकी हो, यानी कोई पोता अपने दादा की प्रॉपर्टी में अपने पिता के जीवित रहते कोई क्लेम नहीं कर सकता है.

F & Q

दादा की जमीन पर किसका हक होता है?

दादा अपनी खुद से अर्जित की गई संपत्ति को जिस भी व्यक्ति को चाहे दे सकता है. अगर बिना वसीयत बनवाए ही दादाजी का देहांत हो जाता है तो उनकी संपत्ति उनके तत्काल या कहें कि प्रथम वरीयता वाले कानूनी वारिसों जैसे पत्नी, पुत्र और बेटी को उस संपत्ति पर कानूनन अधिकार मिल जाएगा. पैतृक संपत्ति पर पोते का कानूनी हक होता है.

पैतृक संपत्ति कितनी पीढ़ी तक लगती है?

पैतृक संपत्ति वह संपत्ति है जो हिंदू संयुक्त परिवार में कम से कम चार पीढ़ियों तक अविभाजित रहती है.

क्या कोई पोता अपने दादा की संपत्ति पर दावा कर सकता है?

पैतृक संपत्ति (ancestral property law) पर कानूनी अधिकारों की बात करें तो पोते का इस प्रकार की संपत्ति पर पूर्ण अधिकार होता है. यदि किसी तरह का विवाद उत्पन्न होता है, तो पोता इस पर अपने हक के लिए दीवानी न्यायालय में जा सकता है. वह पैतृक संपत्ति का वैसा ही हकदार होता है, जैसे उसके पिता या दादा होते हैं.


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Mi Saiyad 23 Years Of Experience In Real Estate Sector. Enterpreneur, Consultant & Coach

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