Property Registry : ज़मीन की रजिस्ट्री करवाने पर बचा सकते हैं आप लाखों रुपए, जान लें यह 4 जरूरी नियम
Property Registry Tips : अगर आपने किसी भी तरह की कोई प्रॉपर्टी या जमीन खरीदी है तो उस प्रॉपर्टी को खरीदने के बाद आपको उसकी रजिस्ट्री करवाना जरूरी होता है.
और किसी भी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री (Property Registry Rules) करवाने में हमको स्टांप ड्यूटी चुकानी पड़ती है, और उसके साथ-साथ हमको उसकी रजिस्ट्रेशन फीस भी सरकार को देनी होती है.
और यह स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस किसी भी प्रॉपर्टी की मार्केट वैल्यू या डीएलसी वैल्यू (Circle Rate) के अनुसार होती है, जो कि कई बार लाखों रुपए में गिनी जाती है.
इस लेख में हम आपको कुछ विशेष बातें बताएंगे जिन बातों का ध्यान रखकर आप अपनी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री (Property Registry) करवाते समय भारी भरकम स्टाम्प ड्यूटी से राहत (Save Property Registry Fees) पा सकते हैं, और उसको कम भी कर सकते हैं. और ऐसा करके आप लाखों रुपए बचा सकते हैं.
हमारे द्वारा बताए गए तरीकों का इस्तेमाल करके आप अपनी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री (Property Registry) में लाखों रुपए की बचत कर लेंगे.तो आईए जानते हैं कि वह खास तरीके क्या है.
Property Registry : ज़मीन की रजिस्ट्री करवाने पर बचा सकते हैं आप लाखों रुपए, जान लें यह 4 जरूरी नियम
किसी भी संपत्ति या जमीन को जब भी हम खरीदते हैं, तो उस संपत्ति को खरीदने के बाद हमको उस संपत्ति की रजिस्ट्री (Property Registry) करवाना जरूरी होता है.
और क्योंकि हमको उस संपत्ति का मालिकाना हक तभी मिलता है, जब हम उस संपत्ति की रजिस्ट्री करवा लेते हैं.और रजिस्ट्री करवाने में हमको स्टांप ड्यूटी (Property Registration Fees) के रूप में एक बड़ी रकम ( Save Money On Registration) सरकार को चुकानी होती है.
संपत्ति का हस्तांतरण कई तरीकों से किया जाता है, और हर तरीके में कई बेहद जरूरी दस्तावेज होते हैं, जिनका पंजीकरण करवाना जरूरी होता है. और इनको तैयार करने में हमारे काफी पैसे स्टांप ड्यूटी के रूप में और रजिस्ट्रेशन फीस (Property Registration Fees) के रूप में लग जाते हैं.
इसके अलावा इसमें प्रोसेसिंग फीस, डिड राइटिंग का खर्चा और कई अन्य खर्च भी शामिल होते हैं.
संपत्ति की स्टाम्प ड्यूटी की गणना कैसे करें
अक्सर संपत्ति की रजिस्ट्री (Property Registry) करवाने में स्टांप ड्यूटी (Property Registration Fees) उस प्रॉपर्टी की मार्केट वैल्यू या डीएलसी वैल्यू (Circle Rate) के अनुसार लगती है, जो की 5% से लेकर 9% तक हो सकती है.
इस वैल्यू (Property Registration Fees) कि अगर हम गणना करेंगे तो यह उस प्रॉपर्टी की मार्केट वैल्यू या डीएलसी वैल्यू (Circle Rate) के अनुसार कई लाखों में हो सकती है.
कई बार संपत्ति की रजिस्ट्री (Property Registry) करवाते समय हमें इस बात का पता नहीं होता कि हमको संपत्ति की रजिस्ट्री (Property Registry) किस तरीके से यानी के संपत्ति का हस्तांतरण किस तरीके से करना चाहिए.
और जानकारी के अभाव की वजह से हम संपत्ति के हस्तांतरण के गलत तरीके को चुन लेते हैं, और उस वजह से हमें बेवजह स्टाम्प ड्यूटी (Property Registration Fees) ज्यादा चुकानी पड़ती है, और इससे हमें लाखों रुपए का नुकसान भी उठाना पड़ता है.
वहीं अगर हमें संपत्ति के हस्तांतरण के सही तरीके का पता होगा तो इससे हम उस संपत्ति के हस्तांतरण के सही तरीके को चुनकर, अपनी संपत्ति की रजिस्ट्री (Property Registry) में स्टांप ड्यूटी (Property Registration Fees) के रूप में लगने वाली लाखों रुपए की स्टांप ड्यूटी को बचा सकते हैं,और उसको कम कर सकते हैं.
1. प्रोपर्टी की वास्तविक मार्केट वैल्यू (Market Valuation) का आकलन
आपको जिस संपत्ति की रजिस्ट्री (Property Registry) करवानी है उस संपत्ति की मार्केट वैल्यू (Market Valuation) का वास्तविक आपको ज्ञान है, तो इससे आप एक बड़ी रकम उस संपत्ति की स्टांप ड्यूटी (Stamp duty) के रूप में चुकाने से बचा सकते हैं.
कई बार हमें उस संपत्ति की वास्तविक मार्केट वैल्यू (Market Valuation) का ध्यान नहीं होता. कई बार संपत्ति की मार्केट वैल्यू कम होती है, लेकिन हम रजिस्ट्री सर्किल रेट (Circle Rate) पर करवा लेते हैं जो कि ज्यादा होती है, और इससे हमें लाखों रुपए की चपत लग जाती है.
How To Save Money On Registration
अगर हमें वास्तविक ज्ञान होगा तो क्योंकि मार्केट वैल्यू कम है, तो हम अपनी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री (Property Registry) भी मार्केट वैल्यू के अनुसार करवाएंगे. इससे हम डीएलसी रेट के रूप में लगने वाली ज्यादा स्टांप ड्यूटी (Save Stamp duty) को कम कर सकते हैं, और इससे हम लाखों रुपए बचा सकते हैं.
इसलिए किसी भी प्रॉपर्टी को खरीदने के बाद उसकी रजिस्ट्री (Property Registry) करवाने से पहले उस प्रॉपर्टी की मार्केट वैल्यू पता करें, और डीएलसी वैल्यू का भी पता करें,और जिस वैल्यू में स्टांप ड्यूटी कम लगती हो उसके अनुसार अपनी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री (Property Registry) करवाएं.
कहीं पर डीएलसी वैल्यू यानी के सर्किल रेट ज्यादा होती है, और वहां पर मार्केट वैल्यू कम है, तो आप उसके लिए सब रजिस्ट्रार (Sub Registrar) से अपील कर सकते है कि आपकी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री (Property Registry) मार्केट वैल्यू की अनुसार की जाए.
स्टाम्प ड्यूटी में छूट कैसे प्राप्त करें
किसी भी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री (Property Registry) में स्टाम्प ड्यूटी में छूट के लिए स्टाम्प एक्ट (Stamp Act) में भी अपील करने का प्रावधान दिया गया है, और आप इसके लिए आवेदन कर सकते हैं.
इसके लिए आपको सब रजिस्ट्रार को एक आवेदन देना होगा, और आपको उसमें बताना होगा कि आप किस वैल्यू पर उस प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री (Property Registry) करवाना चाहते हैं.
इसके लिए सब रजिस्टार उस आवेदन पर विचार करेगा, और उस प्रॉपर्टी की डीएलसी वैल्यू (Circle Rate) और मार्केट वैल्यू (Market Valuation) की गणना करके यह देखा जाएगा की अपील करने वाले का किसमें फायदा है.
और सब रजिस्ट्रार के द्वारा आपकी प्रॉपर्टी की वैल्यू की समीक्षा करने के बाद, उसको मंजूरी के लिए उपायुक्त के पास भेजा जाएगा,और वहां से मंजूरी मिलने के बाद उसकी गणना करके आपको यह बताया जाएगा की आपको किस वैल्यू पर कितनी स्टांप ड्यूटी (Save Stamp duty) चुकानी होगी.
2. कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी से स्टाम्प ड्यूटी में बचत
हम जब किसी ऐसी प्रॉपर्टी को खरीदने की सोचते हैं जो की अंडर कंस्ट्रक्शन है, तो ऐसी प्रॉपर्टी को खरीदते वक्त हम उस प्रॉपर्टी के बिल्डर से 2 एग्रीमेंट निष्पादित करवाते हैं.
एक उस प्रॉपर्टी के सेल एग्रीमेंट (Sale Agreement) के रूप में होता है जिसमें उस प्रॉपर्टी की जमीन से संबंधित तमाम शर्तों का उल्लेख होता है.
दूसरा एग्रीमेंट उस संपत्ति पर बिल्डर के द्वारा जो कंस्ट्रक्शन करवा कर दिया जा रहा है, उसके बारे में होता है.प्रॉपर्टी के अविभाजित हिस्से (Undivided Shares Of Property) के लिए सेल एग्रीमेंट (Agreement to Sale) बनता है.
इसका मतलब यह होता है की साझा क्षेत्र में खरीदार का भी हिस्सा होता है. सेल एग्रीमेंट में प्रॉपर्टी की रेट और कुछ समय बाद उस पर बनने वाले निर्माण की कीमत भी शामिल होती है.
इसके बजाय बिना बटवारा वाली जमीन (Unpartitioned Land) खरीदना काफी सस्ता पड़ता है, इसमें बिल्ट अप क्षेत्र के लिए रजिस्ट्रेशन फीस (Property Registration Fees) नहीं दी जाती है.
और इस पर भविष्य में किए जाने वाले निर्माण का कार्य अगर 50 से 60 लाख रुपए है,तो बिना बंटवारे वाली भूमि की कीमत 20 लाख रुपए के आसपास ही पड़ती है.
इस हिसाब से केवल 20 लाख रुपए पर ही रजिस्ट्रेशन फीस वह स्टांप ड्यूटी आपको देनी पड़ती है, बाकी के जो 30-35 लाख होते हैं उस पर आपको एक तरह से स्टांप ड्यूटी (Property Registration Fees) की बचत होती है.
3. महिला के नाम पर रजिस्ट्री करवाने पर स्टाम्प ड्यूटी (Registration Charges) में भारी छूट
कई राज्यों में पुरुष की बजाय महिला के नाम पर रजिस्ट्री (Property Registry) करवाने पर स्टाम्प ड्यूटी (Registration Charges) में काफी छूट मिलती है, और इस प्रकार किसी भी महिला के नाम से (Property Registration Charges for female) किसी भी संपत्ति की आप रजिस्ट्री करवा कर स्टांप ड्यूटी में फायदा उठा सकते हैं, और इससे बहुत बड़ा पैसा बचा सकते हैं.
इसमें आपने चाहे सामूहिक रूप से किसी महिला के साथ मिलकर कोई संपत्ति खरीदी हो, या अकेले भी खरीदी हो यानी कि अपने पैसों से खरीदी हो, और आप उसकी रजिस्ट्री किसी महिला के नाम से करवाते हैं, तो महिला के नाम पर (Property Registration Charges for female) रजिस्ट्री करवाने से स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज में छूट मिलती है.
स्टाम्प ड्यूटी में छूट किन किन राज्यों में है
और स्पेशली राजस्थान (Registration Fees in rajsthan), उत्तर प्रदेश (Registration Fees in UP), पंजाब (Registration Fees in Punjab), हरियाणा (Registration Fees in Hariyana) और दिल्ली ( Registration Fees in Delhi) आदि राज्य में महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री (Property Registration Charges for female) करवाने में छूट मिलती है.
स्टाम्प ड्यूटी किस राज्य में कितनी लगती है
अब अलग-अलग राज्य में आवासीय (Residentials Property) और व्यावसायिक प्रॉपर्टी (Comercial Property) पर रजिस्ट्रेशन फीस यानी के स्टांप ड्यूटी अलग-अलग है.
अगर हम बात करें दिल्ली की तो दिल्ली में पुरुष के नाम पर रजिस्ट्री करवाने पर 6% और महिला के नाम पर रजिस्ट्री करवाने पर चार पर प्रतिशत की फीस (Property Registration Fees) लगती है.
वही हम राजस्थान की बात करें तो पुरुष के नाम पर रजिस्ट्री करवाने पर 8.8% स्टांप ड्यूटी लगती है, वहीं पर महिला के नाम पर स्टांप ड्यूटी 7.5% की लगती है तो इस प्रकार अगर आप राजस्थान में महिला के नाम से रजिस्ट्री (Property Registry) करवाते हैं तो आपको लगभग 1.3% स्टाम्प ड्यूटी की छूट (Property Registration Charges for female) का फायदा मिलता है.
इस प्रकार रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन पर जो खर्च लगता है उस पर आप साल में टैक्स भी बचा सकते हैं जो की लाखों रुपए का होता है.प्रॉपर्टी हस्तांतरण के तरीकों के बारे में जानने के लिए आप हमारे यूट्यूब चैनल पर जाकर यह वीडियो जरूर देखिये
4. राज्यों के नियमों को जरूर ध्यान में रखें
आमतौर पर प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन (Property Registration Charges) में 5 से 9% स्टाम्प ड्यूटी के रूप में लग जाता है. कई बार ऐसा भी होता है कि राज्य सरकार समय-समय पर रजिस्ट्रेशन चार्ज को कम या ज्यादा करती रहती है.
कई बार स्टाम्प ड्यूटी में छूट का प्रावधान भी होता है, और हमें इस विशेष छूट का फायदा उठाना चाहिए.जैसे कि कई सरकार मार्च या साल के आखिरी सेशन में स्टांप ड्यूटी पर छूट का प्रावधान रखती हैं या ब्याज पेनल्टी में भी छूट का प्रावधान रखा जाता है.
तो आप ऐसे समय का फायदा उठाकर इस समय के दरमियान अपनी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री (Property Registry) करवा कर लाखों रुपए की बचत कर सकते हैं.
इसके लिए आपको अपडेट रहना पड़ेगा और इस बात का ध्यान रखना पड़ेगा कि राज्य सरकार की तरफ से किसी भी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री (Property Registry) करवाने में स्टांप ड्यूटी पर छूट कब मिलती है.
क्योंकि स्टाफ ड्यूटी से होने वाली कमाई से राज्य सरकारों (Property Registration Law of States) के खजाने को ही भरा जाता है यानी के राजस्व इकट्ठा होकर सरकार को ही जाता है.
5. सरकार के नियमों ( Property Registration Rules) का फायदा उठाएं
किसी भी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री (Property Registry) करवाने के लिए अलग-अलग सरकारों के अलग-अलग राज्य में अपने-अपने नियम है.
इसमें कोई ब्लड रिलेशन में रजिस्ट्री करवाता है तो उसके लिए गिफ्ट डीड बनाई जाती है, और ऐसी किसी भी गिफ्ट डीड (Stamp duty on gifted property) में रजिस्ट्री करवाने पर अगर ब्लड रिलेशन में रजिस्ट्री करवाई जा रही है, तो उसमें स्टाम्प ड्यूटी बिल्कुल नहीं लगती और इस तरह की छूट देने वाले राज्यों में राजस्थान, पंजाब,महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश का नाम आता है.
और अगर आप किसी भी संपत्ति की गिफ्ट डीड (Gift Deed) के जरिए रजिस्ट्री करवाते हैं तो आप स्टांप ड्यूटी (Property Registration Charges) के रूप में लाखों रुपए की बचत कर सकते हैं.
निष्कर्ष
तो इस प्रकार किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री (Property Registry) करवाने से पहले अगर कुछ बातों का ध्यान रखेंगे, तो कई तरीकों से हम अपनी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री में लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी को बचा सकते हैं, और इससे अपना पैसा जो की लाखों में होता है, उसकी बचत कर सकते हैं.
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