Power of Attorney-पावर ऑफ अटॉर्नी से नहीं मिलेगा प्रॉपर्टी का मालिकाना हक,सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

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Power of Attorney-पावर ऑफ अटॉर्नी से नहीं मिलेगा प्रॉपर्टी का मालिकाना हक,सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Power of Attorney-हमारे देश भारत में संपत्ति से जुड़े हुए झगड़ों और विवादों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.

इसलिए सुप्रीम कोर्ट समय-समय पर संपत्ति को लेकर दिशा निर्देश और नए-नए जजमेंट देता रहा है.

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of Attorney) से संबंधित एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसने प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री के संदर्भ में कई महत्वपूर्ण मानकों को स्पष्ट किया है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का प्रभाव आने वाले समय में प्रॉपर्टी से जुड़े कई मामलों पर बहुत ही गहरे रूप से पड़ सकता है.

पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of Attorney ) क्या है?

Power of Attorney-पावर ऑफ अटॉर्नी से नहीं मिलेगा प्रॉपर्टी का मालिकाना हक,सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
Power of Attorney-पावर ऑफ अटॉर्नी से नहीं मिलेगा प्रॉपर्टी का मालिकाना हक,सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

आगे बढ़ने से पहले हमको यह जानना आवश्यक है कि पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of Attorney) का मतलब क्या होता है.

कोई भी व्यक्ति किसी भी अन्य व्यक्ति के नाम से जब पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of Attorney) जारी करता है तो यह दस्तावेज उन दोनों व्यक्तियों के मध्य एक तरह का करार होता है, जिसके अंतर्गत पावर ऑफ अटॉर्नी जारी करने वाला व्यक्ति अपने अधिकार अन्य व्यक्ति के नाम से हस्तांतरित करता है.

यह अधिकार वित्तीय मामलों, संपत्ति प्रबंधन, या अन्य व्यक्तिगत मामलों से संबंधित हो सकता है.

हमारे देश में संपत्ति से संबंधित मामलों में अधिकतर लेनदेन पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of Attorney) के माध्यम से किया जाता है.

संपत्ति से संबंधित कई मामलों में यह देखा गया है की संपत्ति के प्रबंधन या उस संपत्ति के बेचान तक में पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of Attorney) का सहारा लिया जाता है.

पावर ऑफ अटॉर्नी से संपत्ति के लेनदेन में कानूनी स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है, फिर भी लोग पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of Attorney) के जरिए अपनी संपत्ति की खरीद या बेचान करते हैं.

और अधिकतर संपत्ति के कई मामलों में इस वजह से मामले विवादित होते हैं, और मामले कोर्ट और कचहरी तक पहुंचते हैं.

क्या था सुप्रीम कोर्ट के फैसले में

अब यह जान लेते हैं कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए मामले की शुरुआत कहां से हुई, जब संपत्ति के मालिक मुनियप्पा ने सरस्वती नामक एक महिला को एक “अपरिवर्तनीय” जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) और एक अपंजीकृत बिक्री समझौता दिया.

इस समझौते में मुनियप्पा ने सरस्वती नामक महिला को उस संपत्ति के प्रबंधन और भविष्य में उसकी बिक्री के समस्त अधिकार दिए थे.

उसके कुछ समय बाद मुनियप्पा का अचानक निधन हो गया.उनकी मृत्यु के बाद सरस्वती ने अपने पास मौजूद POA के आधार पर संपत्ति को अपने बेटे को बेच दिया.

समय के साथ, यह संपत्ति कई हाथों से होकर गुजरी और अंततः एक महिला ने इसे अपनी बेटी को उपहार यानी गिफ्ट डीड के रूप में दे दिया.

बाद में एक अन्य महिला जे मंजुला ने एसएमएस अनंतमूर्ति के खिलाफ कोर्ट में मामला दर्ज कराया, जिसमें संपत्ति पर अपने अधिकार का दावा किया गया था.

निचली अदालत ने मंजुला के पक्ष में फैसला सुनाया और अनंतमूर्ति के दावे को खारिज कर दिया.

उसके बाद यह मामला अपील के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत ने इस विवाद पर अपना अंतिम फैसला सुनाया.

माननीय सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या था?

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इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए यह निर्देश दिया कि पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of Attorney) से मालिकाना हक नहीं मिलता.

कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि सिर्फ पावर ऑफ अटॉर्नी प्राप्त करने से किसी व्यक्ति को संपत्ति का स्वामित्व या मालिकाना हक नहीं मिल जाता.

पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of attorney) केवल एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति की ओर से सिर्फ कार्य करने का अधिकार देता है, न कि स्वामित्व का अधिकार देता है.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of attorney) POA केवल तभी अपरिवर्तनीय (Irrevocable) माना जाएगा, जब वह किसी ऐसे अनुबंध से जुड़ा हो, जिसमें एजेंट (जिसे POA दिया गया है) का स्वयं का हित जुड़ा हो. मात्र दस्तावेज में “अपरिवर्तनीय” शब्द का उल्लेख करने से वह वास्तव में अपरिवर्तनीय नहीं बन जाता.

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मुनियप्पा की मृत्यु के बाद सरस्वती का पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of attorney) POA समाप्त हो गया था.

इसलिए उसको उस संपत्ति के किसी भी प्रकार के हस्तांतरण के अधिकार ही नहीं थे.

संपत्ति हस्तांतरण के लिए पंजीकरण अनिवार्य

माननीय न्यायालय ने आगे निर्देश देते हुए यह स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की संपत्ति के कानूनी हस्तांतरण के लिए पंजीकृत दस्तावेजों के जरिए ही बेचान या लेनदेन संभव है.

बिना पंजीकरण के, किसी भी संपत्ति का हस्तांतरण कानूनी रूप से मान्य नहीं होगा.

इसके लिए कानूनी आधार क्या था?

सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 की धारा 202 का हवाला दिया.

इस धारा के अनुसार, एक एजेंसी (जैसे POA) को अपरिवर्तनीय बनाने के लिए, यह आवश्यक है कि एजेंट का स्वयं का हित एजेंसी के विषय में हो.

दूसरे शब्दों में, POA धारक को संपत्ति में कुछ स्वामित्व अधिकार या हित प्राप्त होना चाहिए, जिसे एक सामान्य समझौते में स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया जाना चाहिए.

इसके अलावा, न्यायालय ने संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 की धारा 54 का भी उल्लेख किया, जिसमें ये बताया गया है कि संपत्ति का हस्तांतरण केवल पंजीकृत दस्तावेजों के माध्यम से ही वैध होता है.

न्यायालय के फैसले का प्रभाव और महत्व

सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिया गया यह अभूतपूर्व फैसला संपत्ति से जुड़े विवादों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण मानक स्थापित करता है और इससे निम्नलिखित क्षेत्र में इसका प्रभाव पड़ेगा.

1. प्रॉपर्टी डीलर्स और खरीदारों पर प्रभाव

न्यायालय के इस फैसले से सभी प्रॉपर्टी डीलर्स और संभावित खरीदारों को बहुत ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है.

यदि कोई व्यक्ति पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of attorney) के आधार पर संपत्ति बेच रहा है, तो खरीदार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि:

  • पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of attorney) POA अभी भी वैध है (मूल मालिक जीवित है)
  • बिक्री के लिए उचित पंजीकृत दस्तावेज तैयार किए जाएं
  • यह स्पष्ट किया जाए कि POA धारक केवल मूल मालिक की ओर से कार्य कर रहा है
2. पुराने पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of attorney) आधारित लेनदेन पर प्रभाव

यह फैसला उन सभी पुराने लेनदेन पर प्रश्न चिह्न लगाता है, जो केवल पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of attorney) POA के आधार पर किए गए थे, विशेष रूप से उन मामलों में जहां मूल संपत्ति मालिक की मृत्यु हो चुकी थी.

ऐसे समस्त मामलों में जिन्होंने पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से समिति को खरीदा है और उसे व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है तो ऐसे समस्त उपयोगकर्ताओं को अपने अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए कानूनी सलाह लेनी चाहिए.

3. कानूनी प्रक्रियाओं में क्या सुधार होगा

माननीय न्यायालय इस फैसले के बाद, रियल एस्टेट क्षेत्र में संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता और कानूनी अनुपालन की संभावना है. इसके लिए सभी रजिस्ट्री कार्यालयों और अन्य संबंधित विभागों को संपत्ति के लेनदेन के दौरान अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता होगी.

पावर ऑफ अटॉर्नी का सही उपयोग कैसे करें?

इस अहम फैसले के मद्देनजर, पावर ऑफ अटॉर्नी का उपयोग करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

1. अपरिवर्तनीयता की शर्तें

यदि पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of attorney) POA को अपरिवर्तनीय बनाना है, तो इसमें एजेंट के हित को स्पष्ट रूप से उल्लेखित करें और यह बताएं कि किस प्रकार एजेंट का हित संपत्ति से जुड़ा है.

2. POA का उद्देश्य स्पष्ट करें

पावर ऑफ अटॉर्नी बनाते समय, इसके उद्देश्य को स्पष्ट रूप से दस्तावेज में उल्लेखित करें.

यदि यह केवल संपत्ति प्रबंधन के लिए है या बिक्री के लिए भी है, तो इसे स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया जाना चाहिए.

3. मृत्यु के बाद की योजना

यदि संपत्ति मालिक अपनी मृत्यु के बाद भी संपत्ति के हस्तांतरण की योजना बना रहा है, तो POA के बजाय वसीयत (विल) जैसे अन्य विकल्पों पर विचार करें.

4. पंजीकरण सुनिश्चित करें

संपत्ति हस्तांतरण के लिए, हमेशा उचित पंजीकृत दस्तावेज तैयार करें.

पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of attorney) POA के आधार पर संपत्ति बेचने के बजाय, एक उचित विक्रय पत्र (सेल डीड) का पंजीकरण कराएं.

फैसले से जुड़े चिंता के बिंदु

हालांकि यह फैसला कानूनी स्पष्टता प्रदान करता है, फिर भी कुछ चिंताएं हैं जिन पर विचार किया जाना चाहिए.

पिछले कई दशकों में, पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of attorney) POA के आधार पर कई संपत्ति लेनदेन हुए हैं.

इस फैसले के बाद, ऐसे सभी लेनदेनों की वैधता पर सवाल उठाए जा सकते हैं.

कई अप्रवासी भारतीय अपनी संपत्तियों के प्रबंधन के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of attorney) POA का उपयोग करते हैं.

इस फैसले के बाद, उन्हें अपनी संपत्ति से जुड़े मामलों को संभालने के लिए नए तरीकों की तलाश करनी पड़ सकती है.

इस फैसले के बाद, पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of attorney) POA से जुड़े विवादों की संख्या में वृद्धि हो सकती है, जिससे अदालतों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है.

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला संपत्ति के अधिकारों और पावर ऑफ अटॉर्नी के उपयोग के संबंध में एक महत्वपूर्ण स्पष्टता प्रदान करता है.

यह स्पष्ट करता है कि पावर ऑफ अटॉर्नी केवल एक प्रतिनिधित्व का साधन है, न कि स्वामित्व हस्तांतरण का साधन है.

संपत्ति का कानूनी हस्तांतरण केवल उचित पंजीकृत दस्तावेजों के माध्यम से ही हो सकता है.

प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में शामिल सभी पक्षों – चाहे वे मालिक हों, खरीदार हों, या POA धारक – को इस फैसले के निहितार्थों को समझना चाहिए और तदनुसार अपनी कार्यवाही को सुनिश्चित करना चाहिए.

निष्कर्ष

संपत्ति से जुड़े मामलों में पूर्ण कानूनी अनुपालन न केवल वर्तमान लेनदेन की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि भविष्य में होने वाले किसी भी विवाद से भी हमें बचाता है.

संपत्ति से जुड़े मामलों में हमेशा सतर्क रहना और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है.

 

 

 


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Mi Saiyad 23 Years Of Experience In Real Estate Sector. Enterpreneur, Consultant & Coach

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