Property Rights : पैतृक संपत्ति को लेकर हाईकोर्ट ने दिया अहम फैसला (New Laws On Ancestral Property In India)
पैतृक संपत्ति के बदल गए नियम,जानिये पुत्र या पुत्री कब तक नहीं जता सकते अपना हक और अधिकार.
property Knowlege : आमतौर से पैतृक संपत्ति को लेकर प्रॉपर्टी के सही नियम और कायदे कानून पता नहीं होने की वजह से परिवार में विवाद और लड़ाई झगड़े होते रहते हैं.
इसी तरह का पैतृक संपत्ति का एक केस हाईकोर्ट (HC decision on property) के पास पेश हुआ था, जिसमें हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया.
इस फैसले में (New Laws On Ancestral Property In India) हाई कोर्ट ने बताया कि कब पुत्र या पुत्री पैतृक संपत्ति में से अपना हक और हिस्सा नहीं मांग सकते.
हाई कोर्ट के द्वारा दिया गया यह फैसला पैतृक संपत्ति में से पुत्र और पुत्री के अधिकार और उनकी सीमा को स्पष्ट करता है. तो आइए हाई कोर्ट के इस फैसले की विस्तार से समझते हैं.
New Laws On Ancestral Property In India: पैतृक संपत्ति के बदल गए नियम
Property Rights : पैतृक संपत्ति को लेकर हाईकोर्ट ने दिया अहम फैसला (New Laws On Ancestral Property In India), जानिये पुत्र या पुत्री कब तक नहीं जता सकते अपना हक और अधिकार.
पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) में अपने हक और हिस्सों को लेकर अक्सर कोर्ट में परिवारों के बीच आपसी लड़ाई झगड़े होना आम बात है.
लेकिन इसके बावजूद सरकार ने कानून में हर तरह की संपत्ति में उसके हक और हिस्सेदारों के अधिकार और राइट्स को लेकर काफी बड़े प्रावधान किए हैं.
और सरकार द्वारा किए गए यह प्रावधान संपत्ति से संबंधित सभी आमजन के अधिकार (Property Rights) को लेकर माहौल और स्थिति के अनुसार अपने निर्णय देने में सक्षम होते हैं.
आमतौर पर यही देखा गया है की पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) पर ज्यादातर उस संपत्ति के वारिसान का ही अधिकार होता है, लेकिन कई बार ऐसी स्थितियां बन जाती है कि, उस पैतृक संपत्ति पर पुत्र या पुत्री का या उसके उत्तराधिकारी का (New Laws On Ancestral Property In India) किसी भी प्रकार का कोई अधिकार नहीं रहता.इस विषय पर वीडियो आप हमारे यूट्यूब चैनल पर जाकर देख सकते हैं.
और इसी मुद्दे और विषय पर हाईकोर्ट ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए फैसला (New Laws On Ancestral Property In India)हाल ही में सुनाया है, जिसको हर पैतृक संपत्ति के वारिस को जानना और समझना बेहद जरूरी है.
High court में क्या पेश हुआ था मामला-
हाई कोर्ट में एक पैतृक संपत्ति को लेकर याचिका दायर की गई थी जिसकी सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट (high court news) ने कुछ अहम टिप्पणी के साथ फैसला सुनाया.
इस केस में मां के नाम से दो फ्लैट (property rights in law) थे जिनका टाइटल मां के नाम होने से वो सेल्फ एक्वायर्ड प्रॉपर्टी बन गई थी और उसके पति की स्थिति ठीक नहीं थी, उनको इलाज की जरूरत थी, वह अस्पताल में एडमिट थे और उनके इलाज के लिए उन्होंने फ्लैट बेचने का फैसला किया, और बेटा यह नहीं चाहता था, इसलिए मां को फ्लैट बेचने से रोकने के लिए बेटे (son’s property rights) ने कोर्ट में गुहार लगाई थी. इस केस में फैसला (New Laws On Ancestral Property In India) सुनाते हुए हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की थी.
बॉम्बे हाईकोर्ट की क्या थी टिप्पणी –
इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court ) ने बेटे की याचिका की सुनवाई करते हुए कहा की माता-पिता के जीवित रहने तक कोई भी संतान उनकी संपत्ति पर अपना अधिकार नहीं जमा सकती.
कोर्ट ने इस मामले में बीमार पति की गंभीर स्थिति को देखते हुए याचिका कर्ता की मां के हक में फैसला (New Laws On Ancestral Property In India) सुनाया और कहा कि बीमार पति के इलाज के लिए उसको किसी से पूछने की जरूरत नहीं है और वह बिना किसी से पूछे ही संपत्ति (self aquired property) बेच सकती हैं.
हाई कोर्ट ने केस का निस्तारण करते हुए याचिका कर्ता को यह कहा कि आपके माता-पिता जीवित हैं, और उनके जीवित रहते उनकी सेल्फ एक्वायर्ड प्रॉपर्टी (self aquired property) में सिर्फ उनका ही अधिकार है.
कोर्ट (bombay high court) ने यह भी कहा कि ऐसे में किसी भी बेटे को अपने पिता की संपत्ति में इस तरह से उनके जीवित रहते किसी भी तरह का कोई भी अधिकार जताने की आवश्यकता नहीं है.
अपनी संपत्ति को बेचने के लिए माता-पिता को किसी भी अन्य शख्स से इजाजत लेने की जरूरत नहीं है, वह किसी भी समय अपनी प्रॉपर्टी को अपनी जरूरत के लिए बेच सकते हैं. और इस प्रॉपर्टी से संबंधित तमाम अधिकार उनके माता-पिता के ही है इसमें बेटे का कोई भी अधिकार नहीं बनता है.
याचिका कर्ता के वकील का कोर्ट में तर्क-
बीमार बाप के बेटे के वकील ने अदालत में यह तर्क दिया था कि बेटा ही कई साल से अपने पिता की देखभाल कर रहा है और एक अभिभावक की भूमिका निभा रहा है. इसलिए इस संपत्ति (self aquired property) पर उसका हक बनता है. इस पर कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा था तो बेटे को खुद को कानूनी पेरेंट्स नियुक्त करने के लिए कोर्ट में आना चाहिए था.
याची के वकील से जब पूछा गया कि क्या वो बेटा कभी पिता को इलाज के लिए डॉक्टर के पास लेकर गया है? कभी उसने किसी मेडिकल बिल का भुगतान किया है? इन सवालों का जवाब बेटा नहीं दे पाया तब कोर्ट ने कहा कि ऐसे बेटे का परिवार की संपत्ति (family property rights) पर कोई हक नहीं बनता.
ऐसे में जब अस्पताल के बिलों का भुगतान मां कर रही है. और बेटे ने अपनी तरफ से कुछ नहीं किया तो ऐसे में किसी भी धर्म या समुदाय के लिए उत्तराधिकार कानून हो, एक बेटे को माता-पिता की प्रोपर्टी पर अधिकार (property rights act) जमाने का हक नहीं होता है.
इस मामले में हाईकोर्ट ने फैसला (high court decision on property) लेते हुए मामले को ही खारिज कर दिया.
F & Q
What are the new rules for ancestral property?
यदि मृतक द्वारा कोई वसीयत नहीं छोड़ी गई हो तो पैतृक संपत्ति को बिना वसीयत के उत्तराधिकार के कानून के अनुसार विरासत में प्राप्त किया जाता है.
What is the latest Supreme Court decision on ancestral property?
सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि बिना वसीयत के मरने वाले हिंदू पुरुष की स्व-अर्जित संपत्ति उत्तराधिकार के आधार पर मिलती है न कि विरासत में.
Can I claim my ancestral property after 50 years?
The time limit to claim ancestral property in India is typically around 12 years.
पैतृक संपत्ति के लिए नए नियम क्या हैं?
अगर मृतक द्वारा कोई वसीयत नहीं छोड़ी गई है तो पैतृक संपत्ति को बिना वसीयत के उत्तराधिकार के कानून के अनुसार विरासत में दिया जाता है. इसका मतलब है कि संपत्ति सभी कानूनी उत्तराधिकारियों के बीच समान रूप से विभाजित की जाती है.
When can a daughter cannot claim father’s property?
यदि पिता जीवित हैं और उन्होंने अपनी स्व-अर्जित संपत्ति किसी अन्य के नाम कर दी है, या यदि उनकी मृत्यु 2005 से पहले हो गई है और संपत्ति पैतृक है, या यदि उन्होंने वैध वसीयत बनाकर अपनी बेटी को उत्तराधिकार से बाहर रखा है, तो बेटी अपने पिता की संपत्ति पर दावा नहीं कर सकती.
Can I gift deed my ancestral property?
No. An ancestral property can not be gifted.
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