Ancestral Property Rights : पैतृक संपत्ति में पुत्र और पुत्री का कितना अधिकार, हाईकोर्ट ने दिया अहम फैसला
आए दिन कोर्ट में पैतृक संपत्ति (Ancestral Property Rights) से जुड़े कई मामले देखने को मिलते हैं.
ज्यादातर मामले पैतृक संपत्ति (Ancestral Property Rights) को लेकर पारिवारिक विवाद के रूप में देखे और सुने जाते हैं, क्योंकि पैतृक संपत्ति (Ancestral Property Rights) में पुत्र और पुत्री को जन्म से ही अधिकार मिल जाता है.
हाल ही में हाई कोर्ट के एक फैसले के अनुसार पैतृक (Ancestral Property Rights) संपत्ति में पुत्र और पुत्री को कितना अधिकार है, इस बात को क्लियर किया गया है.
पैतृक संपत्ति को लेकर सरकार ने कुछ नियम (Rules of Ancestral Property) और प्रावधान किए है, जिनके बारे में आज भी आम लोगों को पता नहीं है.
पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) और स्व अर्जित (Self Acquired Property) संपत्ति में अंतर
मूलतया संपत्ति दो प्रकार की होती है, एक संपत्ति खुद की कमाई से प्राप्त पैसों से अर्जित संपत्ति जो कि स्व अर्जित संपत्ति (Self Acquired Property) कहलाती है, दूसरी होती है पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) जो की पीढ़ी दर पीढ़ी विरासत के तौर पर पूर्वजों के द्वारा प्राप्त होती है.
स्व अर्जित संपत्ति (Self Acquired Property) में उसके मालिक को यह अधिकार होता है कि वह अपनी संपत्ति चाहे जिसको दे, लेकिन पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) में ऐसा नहीं होता. पैतृक संपत्ति में पुत्र और पुत्री का जन्म से अधिकार होता है.
लेकिन पैतृक संपत्ति (Ancestral Property Rights) में से हर बार पुत्र और पुत्री (ancestral property rights to son) को अधिकार मिले, यह जरूरी नहीं है, इसलिए पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) पर अधिकार जमाने से पहले सरकार के द्वारा तय किए गए नियमों को हमारे लिए जानना बेहद जरूरी है.
हाल ही में दिए गए अपने एक फैसले में हाईकोर्ट (High Court) ने पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) में पुत्र और पुत्री के अधिकार (ancestral property rights to son and daughter) को स्पष्ट किया है.
जानिए कोर्ट के सामने क्या था पूरा मामला-
इस पूरे मामले की बात करें तो दिल्ली के एक शख्स की मृत्यु के बाद उसकी प्रॉपर्टी (hindu ancestral property rights) का बंटवारा हुआ.
वैसे तो नियम और कानून के अनुसार उसकी प्रॉपर्टी का आधा हिस्सा उसकी पत्नी को और आधा हिस्सा पुत्र और पुत्री को मिलना था, क्योंकि उनकी संतान में एक पुत्र और एक पुत्री शामिल थी.
पिता की मृत्यु के पश्चात जब उसकी पुत्री ने पिता की प्रॉपर्टी में अपना हक और हिस्सा (ancestral property rights to married daughters) मांगा तो पुत्र ने उसका हिस्सा देने से साफ इंकार कर दिया, लेकिन उसके बाद भी पुत्री ने हार नहीं मानी और उसने अपने हक और हिस्से (ancestral property rights for daughters) के लिए कोर्ट में गुहार लगाई.
मां ने भी प्रोपर्टी में पुत्री के हक और हिस्से (ancestral property rights to married daughters in india) को लेकर पुत्री का समर्थन किया, जिस पर उसके पुत्र ने असहमति जताते हुए यह कहा कि पूरी प्रॉपर्टी उसकी ही है और उसे ही मिलनी चाहिए.
इस पूरे मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट में हुई और कोर्ट ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) के तहत इस केस में अपना फैसला सुनाया.पैतृक संपत्ति के नियमों से सम्बंधित वीडियो आप हमारे यूट्यूब चैनल पर देख सकते हैं
हाई कोर्ट ने बेटे पर लगाया जुर्माना-
कोर्ट ने इस केस पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि अभी मृतक की पत्नी भी जिंदा हैं, और मृतक की पत्नी और पुत्री का भी उसकी प्रॉपर्टी में बेटे ( son daughter ancestral property) के बराबर का हक बनता है.
यह कहते हुए कि बेटे का दावा ही गलत है, कोर्ट ने मामले का निस्तारण करते हुए बेटे पर एक लाख रुपए का हर्जाना भी लगाया.
क्योंकि इस पूरे मामले में (ancestral property rules in India) मां और पुत्री को संपत्ति में अपने हक और हिस्से के लिए आर्थिक नुकसान के साथ साथ मानसिक तनाव से भी गुजरना पड़ा.
इसके अलावा हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए यह भी कहा कि इस तरह के मामले इन दिनों में काफी देखे जा रहे हैं, और इस तरह की पैतृक संपत्ति (ancestral property rights in india) को लेकर परिवार में ऐसी घटना होना आम बात है.
दिल्ली हाई कोर्ट का क्या था फैसला-
दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High court Decisisons) की ओर से बीते वर्ष एक केस को लेकर फैसला दिया गया था, कि पिता की पूरी संपत्ति पर पूरा अधिकार पुत्र का नहीं हो जाता है.
उनकी संपत्ति में पुत्री का अधिकार भी उतना ही होता है और जब तक उसकी पत्नी और पुत्री जीवित है, उनकी पूरी संपत्ति पुत्र की नहीं हो जाती है.
हालांकि हमारे समाज में पैतृक संपत्ति के बंटवारे (ancestral property rights to married daughters in india) को लेकर कई तरह की सरकार ने कानूनी व्यवस्थाएं करके रखी हैं, लेकिन इसका प्रक्रिया काफी जटिल है, और आम लोगों को यह जितना सरल दिखता है उतना सरल है नहीं, इसलिए सबको समझ भी नहीं आता.
पैतृक संपत्ति (Ancestral Property Rights) का हिंदी में क्या अर्थ है?
पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) का मतलब है, पिता या पूर्वजों से विरासत में मिली संपत्ति. यह संपत्ति भावनात्मक और आर्थिक रूप से बहुत अहम होती है.
पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) की खास बातें:
- यह संपत्ति पीढ़ी दर पीढ़ी चली आती है.
- यह संपत्ति चार पीढ़ियों तक बिना बंटवारे के पुरुष वंश के ज़रिए आगे बढ़ती है.
- पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी का अधिकार जन्म से ही मिल जाता है.
- पैतृक संपत्ति में अधिकार प्रति व्यक्ति नहीं, बल्कि प्रति वर्ग के आधार पर तय होते हैं.
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 (Hindu Succession Act) में दो तरह की पैतृक संपत्तियां बताई गई हैं, जिनमें संयुक्त संपत्तियां और अलग-अलग संपत्तियां शामिल हैं.
पैतृक संपत्ति से जुड़ी कुछ और बातें:
हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम 2005 ने बेटियों को सहदायिक अधिकार दिए, जिससे वे बेटों के बराबर हो गईं.
विवाहित बेटियों को भी अविवाहित बेटियों की तरह ही पैतृक संपत्ति में समान उत्तराधिकार अधिकार मिलते हैं.
किसी शख्स को उसकी पैतृक संपत्ति से बेदखल नहीं किया जा सकता.
पुत्र और पुत्री के पैतृक संपत्ति (ancestral property rights) में हक को लेकर कानून-
हमारे समाज में एक मान्यता रही है कि पुत्र को ही परिवार का वारिस समझा जाता है, और क्योंकि हमारा देश एक पुरुष प्रधान देश है इसलिए पुत्र को ही संपत्ति का उत्तराधिकारी भी माना जाता है.
लेकिन 2005 में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 2005 (Hindu Succession Act 2005) में बदलाव करने के बाद नए कानून के अनुसार पुत्र और पुत्र को पिता की संपत्ति में बराबर बराबर अधिकार (ancestral property rights to grand daughters) दिया गया.
इस एक्ट के लागू होने से पहले (rules regarding ancestral property) पुत्री को पिता की संपत्ति में से अधिकार नहीं दिया जाता था.
पैतृक संपत्ति (Ancestral Property Rights) को बेचने को लेकर नियम-
पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) किसी भी पुरुष पिता, दादा या परदादा से उत्तराधिकार में पीढ़ी दर पीढ़ी विरासत में प्राप्त संपत्ति होती है.
जब परिवार में एक बच्चा जन्म लेता है तो जन्म लेने के साथ ही वह पिता की पैतृक संपत्ति का अधिकारी माना जाता है.
पैतृक संपत्ति (how to claim ancestral property) को बेचने को लेकर हमारे कानून में नियम काफी कठोर बनाए गए हैं, क्योंकि पैतृक संपत्ति (Ancestral Property Rights) में बहुत से लोगों की हिस्सेदारी होती है.
जब तक पैतृक संपत्ति (Ancestral property selling rules) का आपस में बंटवारा नहीं कर लिया जाता तब तक कोई भी हिस्सेदार इसे अपनी मर्जी से नहीं बेच सकता है.
भारतीय कानून के अनुसार पैतृक संपत्ति (Ancestral Property Rights) बेचने के लिए सभी हिस्सेदारों और वारिसों की सहमति जरूरी होती है.
अगर पैतृक संपत्ति (Ancestral Property Rights) का कोई एक भी हिस्सेदार या वारिस पैतृक संपत्ति को बेचने पर सहमत नहीं होता है,और सभी हिस्सेदारों एकमत नहीं होते हैं, तो ऐसी स्थिति में उस संपत्ति को बेचा नहीं जा सकता है.
लेकिन, वहीं पर अगर पैतृक संपत्ति (Ancestral Property Rights) को बेचने के लिए सभी हिस्सेदार और वारिस एकमत और सहमत है, तो ऐसे में उस संपत्ति को बेचने में कोई दिक्कत नहीं होगी.
वहीं पैतृक संपत्ति (ancestral property rights in islam) को लेकर इस्लाम धर्म में कुछ अलग तरीके से संपत्ति का बंटवारा किया जाता है.
F & Q
What are the rules for ancestral property?
In India, ancestral property, or coparcenary property, is jointly owned by male members of a Hindu Undivided Family (HUF) and passed down through generations, with each coparcener having a right to it by birth, but this right is lost if the property is partitioned
Who is the owner of ancestral property?
Ancestral property is inherited according to the laws of intestate succession if there is no will left by the deceased. This means that the property is divided equally among all legal heirs
How many generations can claim ancestral property?
हिंदू कानून के संदर्भ में, पैतृक संपत्ति, जो पुरुष वंश की चार पीढ़ियों के माध्यम से विरासत में मिलती है, परिवार के सभी जीवित सदस्यों के दावों के अधीन होती है, जिसमें बेटियां भी शामिल हैं, जिन्हें सह-उत्तराधिकारी माना जाता है।
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