Ancestral Property Eviction : बेदखल करने के बाद भी संतान को इस प्रोपर्टी में मिलेगा हिस्सा, जानें पैतृक संपत्ति से जुड़ा कानून

पैतृक संपत्ति में हक और अधिकार (Ancestral Property Rights)

जैसा कि आप जानते हैं कि एक पिता की स्व अर्जित संपत्ति में जिस प्रकार उसके बच्चों वह उसके नाती पोतों का हक (Property Rights) और अधिकार होता है उसी प्रकार पैतृक संपत्ति में भी बच्चों व नाती पोतों का हक और अधिकार (Property Rights) होता है.

लेकिन उनको उस संपत्ति से बेदखल (Ancestral Property Eviction : बेदखल करने के बाद भी संतान को इस प्रोपर्टी में मिलेगा हिस्सा) दिए जाने पर क्या पैतृक संपत्ति में से उनका हिस्सा या हक मिलेगा या नहीं मिलेगा इस बात की जानकारी काफी लोगों को नहीं है.

कानून में इस बात को लेकर कुछ विशेष प्रावधान किए गए हैं और वह यह हैं कि बेटे या पोते नाती को बेदखल करने के बाद भी उनका उस संपत्ति पर अधिकार होता है. और इसके लिए पैतृक संपत्ति से जुड़ा हुआ कानून भी खासतौर से बनाया गया है.

आइये जानते हैं इस बारे में क्या है कानून में खास प्रावधान

Ancestral Property Eviction  

बेदखल करने के बाद भी संतान को इस पैतृक प्रोपर्टी में मिलेगा हिस्सा, जानें पैतृक संपत्ति से जुड़ा कानून

पैतृक संपत्ति के रूल्स और नियम (Ancestral Property rules)

अक्सर हमारे समाज में देखा गया है कि पैतृक संपत्ति को लेकर कई तरह के विवाद सामने आते रहते हैं और क्योंकि संपत्ति से जुड़े हुए कई विवाद अक्सर होते रहते हैं तो अगर पैतृक संपत्ति में से पिता अगर अपनी संतान को बेदखल कर देता है तो भी संतान का उस संपत्ति में हिस्सा रहता है.पैतृक संपत्ति से संबंधित वीडियो आप हमारे यूट्यूब चैनल पर भी देख सकते है.

बेदखल करने के बाद भी संतान को इस प्रोपर्टी में मिलेगा हिस्सा, जानें पैतृक संपत्ति से जुड़ा कानून
बेदखल करने के बाद भी संतान को इस प्रोपर्टी में मिलेगा हिस्सा, जानें पैतृक संपत्ति से जुड़ा कानून

पैतृक संपत्ति में से संतान को बेदखल करने के लिए कुछ कानूनी प्रावधान है जिनको आप सभी को जानना बेहद जरूरी है.आइए आपको बताते हैं कि पैतृक संपत्ति में से संतान के सभी कानून (children rights on Ancestral property) क्या हैं.

यह है कानून में प्रावधान

माता-पिता अपनी संतान को अपनी स्व अर्जित संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं, लेकिन पैतृक संपत्ति पर संतान का अधिकार बना रहता है। यदि संतान को बेदखल किया जाता है, तो वह कोर्ट से पैतृक संपत्ति पर अपना दावा कर सकती है.

सामान्यत: कोर्ट का फैसला संतान (Court decision on Ancestral property) के पक्ष में होता है. क्योंकि उसे पैतृक संपत्ति पर जन्म से कानूनी अधिकार प्राप्त होता है.

हालांकि, कुछ विशेष मामलों में कोर्ट के द्वारा माता-पिता के पक्ष में भी निर्णय दिए गए है, लेकिन उसमें कुछ विशेष कारण रहे हैं.

जैसे की संतान के द्वारा माता-पिता की अपेक्षा करना,उनकी बात नहीं मानना या उनके साथ गलत व्यवहार करना, बाकी सामान्य मामलों में कोर्ट संतान के फेवर में ही फैसला करता है और वह माता-पिता को सपोर्ट नहीं करता.

कौन सी संपत्ति होती है पैतृक संपत्ति (Ancestral Property)

पैतृक संपत्ति (Ancestral Property ) वह संपत्ति होती है जो किसी व्यक्ति को उसकी 4 पीढ़ियों से उसके पूर्वजों से प्राप्त होती है. इस संपत्ति के बारे में हिंदू उत्तराधिकार कानून 1956 (Hindu Succession Act 1956) की धारा 4, 8 और 19 में भी विशेष तौर से बताया गया है.

जब यह संपत्ति परिवार की एक से अधिक पीढ़ियों से चली आ रही हो और जब तक परिवार में कोई विभाजन नहीं हुआ हो तो यह संपत्ति पूर्वजों की संपत्ति मानी जाती है। इसमें पिता और माता दोनों के बच्चों का समान अधिकार होता है.

यह संपत्ति एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होती है और अगर परिवार में संपत्ति का बंटवारा (division of ancestral property) हुआ है तो वह संपत्ति पहले जैसी नहीं रहती इसका स्वरूप बदल जाता है, और इसको फिर स्व अर्जित संपत्ति मान लिया जाता है.

और स्व अर्जित संपत्ति के मालिक को यह अधिकार होता है कि वह अपनी संतान को इस स्व अर्जित संपत्ति से बेदखल कर सकता है और अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकता है.

पैतृक संपत्ति ( Ancestral Property) पर किसका कितना हक होता है.

पैतृक संपत्ति में से सभी की हिस्सेदारी समय के साथ बदलती रहती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि पूर्वजों ने कितनी संपत्ति अर्जित (Self earned property rights) की थी।

यदि कोई व्यक्ति अकेला है, तो उसे पूरा हिस्सा मिल सकता है, लेकिन यदि भाई-बहन हैं, तो संपत्ति आपस में बांटी जाती है। और अगर कोई परिवार में नया बच्चा जन्म लेता है तो उसका हिस्सा भी बन जाता है.परिवार के हर सदस्य को उतना ही हिस्सा मिलेगा जितना उसके पिता या दादा के पास था। कभी-कभी कुछ व्यक्तियों को अधिक संपत्ति मिलती है, जबकि कुछ को कम मिलती है। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि उनके पूर्वजों को कितनी संपत्ति (Ancestral property division) मिली और वे उसे कैसे बांटते थे.

पैतृक (Ancestral property)और विरासत संपत्ति (inherited property) में क्या अंतर है.

पैतृक संपत्ति केवल पिता के परिवार से जुड़ी होती है और इसे एक प्रकार की पारंपरिक संपत्ति माना जा सकता है। हालांकि, हर विरासत (inherited property) में मिली संपत्ति पैतृक (Ancestral property) नहीं होती। जैसे अगर किसी को नानी, मामा, या मां की तरफ से संपत्ति मिलती है, तो वह संपत्ति विरासत में मिली मानी जाती है, लेकिन पैतृक नहीं।

इसका मतलब यह है कि पैतृक संपत्ति केवल उन परिवारों से मिलती है जो सीधे पिता, दादा और परदादा से जुड़े होते हैं। विरासत और पैतृक संपत्ति (inherited and ancestral property ) के बीच यह मुख्य अंतर है कि हर विरासत पैतृक नहीं होती, बल्कि यह परिवार के सीधे रक्त संबंधों (Blood Relation) से जुड़ी होती है.

F & Q

What is the rule for ancestral property?

Property inherited from a paternal ancestor: Property inherited by a male Hindu from his father, father’s father, or father’s father’s father, is ancestral property.

Who is the owner of ancestral property?

Property inherited by a Hindu from his father, father’s father or father’s fathers’ father, is ancestral property

पैतृक संपत्ति का नियम क्या है?

पैतृक पूर्वज से विरासत में मिली संपत्ति: किसी हिंदू पुरुष को उसके पिता, पिता के पिता या पिता के पिता के पिता से विरासत में मिली संपत्ति पैतृक संपत्ति होती है

How do I remove my sister from property?

To remove a sister from a property in India, you can use a release deed, relinquishment deed, gift deed, sale deed, will, or intestate succession.

विभाजन पर सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला क्या है?(Latest Supreme Court Judgement on Partition Suit)

हाल ही में एक ऐतिहासिक फैसले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संयुक्त संपत्ति के बंटवारे के मुकदमे में, प्रत्येक इच्छुक पक्ष को वादी माना जाता है ।

 


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Mi Saiyad 23 Years Of Experience In Real Estate Sector. Enterpreneur, Consultant & Coach

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