प्रॉपर्टी ट्रांसफर कैसे करे: प्रक्रिया, नियम और ब्लड रिलेशन में हस्तांतरण

जैसा कि आप जानते हैं की संपत्ति को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर करने के बहुत सारे तरीके हैं और इन सभी तरीकों में आपको सरकार को उसे प्रॉपर्टी के हस्तांतरण के बदले स्टांप ड्यूटी को चुकाना पड़ता है, लेकिन अब आपको किसी भी तरह के संपत्ति हस्तांतरण के तरीके में स्टांप ड्यूटी देने की जरूरत नहीं है.
में आपको ऐसे संपत्ति हस्तांतरण के तरीके बताऊंगा जिस तरीके से अगर आप संपत्ति का हस्तांतरण करते है तो आपको स्टांप ड्यूटी नहीं चुकानी पड़ेगी क्योंकि प्रॉपर्टी के हस्तांतरण के तरीके ऐसे भी हैं जिसमें आपको किसी भी तरह की स्टांप ड्यूटी चुकाने की जरूरत नहीं पड़ती है.
भारत में संपत्ति हस्तांतरण के प्रकार
इस लेख में हम आपको यही बताएंगे कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के नाम से संपत्ति हस्तांतरण के तरीके कितने हैं, और किस तरीके में कितनी स्टांप ड्यूटी लगती है,और किस तरीके में किस तरीके से आप स्टांप ड्यूटी को बचा सकते हैं.इसके साथ इसी विषय पर हमारे यूट्यूब चैनल पर जाकर वीडियो भी देख सकते हैं
1.सेल डीड ( बेचान इकरारनामा ) के जरिए संपत्ति हस्तांतरण
संपत्ति को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर करने का जो सबसे प्रचलित तरीका है वह है सेल डीड के जरिए अपनी संपत्ति का हस्तांतरण करना और यह तरीका सबसे ज्यादा लोग काम में लेते हैं.
संपत्ति हस्तांतरण के तरीके
जब कोई दो व्यक्ति किसी भी संपत्ति का आपसी लेनदेन यानी के खरीद या बेचान करते हैं और उसके बदले किसी भी तरह के पैसे का लेनदेन करते हैं,और तब उन दोनों व्यक्तियों के बीच संपत्ति के हस्तांतरण के स्वरूप बेचान इकरारनामा (सेल डीड) को बनाया जाता है.
बेचान इकरारनामा (सेल डीड) बनाने का प्रोसेस
कोई व्यक्ति जब किसी संपत्ति को खरीदना चाहता है तो वह किसी भी संपत्ति को देखकर उसकी मार्केट वैल्यू तय करके उस संपत्ति को खरीदने का सौदा करता है, और जिस दिन सौदा होता है, उसी दिन एक सेल एग्रीमेंट (Agreement of Sale ) बनाया जाता है जिसमें उसे प्रॉपर्टी के सौदे से संबंधित तमाम तरह की शर्तों का उल्लेख किया जाता है.
प्रॉपर्टी को खरीदने वाला व्यक्ति सेल एग्रीमेंट में लिखी शर्तों के अनुसार उस संपत्ति को खरीदने के लिए एडवांस के तौर पर पांच परसेंट अमाउंट देता है,और बाकी का 95% अमाउंट वह रजिस्ट्री के दिन देता है,और उसी दिन उस प्रॉपर्टी का 95% पेमेंट देकर वह अपने नाम से सेल डीड को निष्पादित करवा लेता है.
अब कई बार किसी भी प्रॉपर्टी की मार्केट वैल्यू अलग होती है और सरकार की तय की गई दर जिनको की डीएलसी वैल्यू बोला जाता है वह अलग होती है.
तो किस दर पर प्रॉपर्टी की सेल डीड को निष्पादित करवाया जाना है वह सेलर और बॉयर आपस में तय कर लेते हैं और उसके अनुसार पैसे का लेनदेन आपस में कर लेते हैं.
लेकिन आपने जो भी दर तय की है उस दर पर पर आपकी रजिस्ट्री होनी है, सरकार आपसे स्टांप ड्यूटी वसूलते हैं. और स्टांप ड्यूटी अलग-अलग राज्य में अलग-अलग हो सकती है.
किस राज्य में कितनी स्टांप ड्यूटी लगती है
अगर हम राजस्थान की बात करें तो वह 8.8 परसेंट पुरुष के नाम से करने पर होती है, वहीं पर अगर आप किसी महिला के नाम से इसको करवाना चाहे तो यह करीब 7.5% के आसपास लगती है. इस प्रकार महिला के नाम से किसी भी प्रॉपर्टी की सेल डीड करवाने पर 1.3% का फायदा उठा सकते है.
2.रिलइंक्विसमेंट डीड ( relinquishment deed ) द्वारा संपत्ति का हस्तांतरण
रिलइंक्विसमेंट डीड ( relinquishment deed ) में एक व्यक्ति अपने प्रॉपर्टी के हक और अधिकार को किसी दूसरे व्यक्ति के हक़ में त्याग देता है,और इस प्रकार अपने हक को त्यागने के लिए वह जो डिड बनाता है उसको हक त्यागपत्र या हक त्यागनामा या रिलइंक्विसमेंट डीड ( relinquishment deed ) कहा जाता है.
रिलइंक्विसमेंट डीड ( relinquishment deed ) क्यों बनाया जाता है
हक त्यागपत्र अक्सर पैतृक संपत्तियों में परिवार की बेटियां अपने भाइयों के हक में अपने हक को और अपने अधिकार को छोड़ने के लिए हक़ त्याग पत्र बनवाती हैं.
ऐसा परिवार की वह बेटियां जिनकी शादी हो चुकी है, और उनकी शादी में काफी खर्च करके काफी दान दहेज दिया जाता है, इसलिए अच्छे घर में शादी हो जाने के बाद वह अपने परिवार से किसी भी प्रॉपर्टी में कोई भी हिस्सा अपनी मर्जी से नहीं लेना चाहती, और अपने हक हिस्से को वह अपने परिवार के किसी भाई या अपने पिता के नाम से छोड़ देना चाहती हैं.
रिलइंक्विसमेंट डीड ( relinquishment deed )में स्टांप ड्यूटी कितनी लगती है
संपत्ति का हस्तांतरण करने का यह तरीका काफी सस्ता है और इसमें स्टांप ड्यूटी बिल्कुल नहीं लगती,लेकिन कुछ प्रोसेसिंग फीस लगती है जो कि 2,3 हजार के आसपास होती है.
इस प्रकार यह एक बहुत अच्छा तरीका है किसी भी संपत्ति को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के नाम अपने हक को ट्रांसफर करने का, जो की बहुत ही कम खर्चीला है.
3.गिफ्ट डीड (Gift Deed)से संपत्ति का हस्तांतरण

तीसरा सबसे प्रचलित जो तरीका है और कानूनी रूप से जो मजबूत तरीका है वह है गिफ्ट डीड के जरिए संपत्ति का स्थानांतरण करना.
गिफ्ट डीड (Gift Deed) और सेल डीड ( बेचान इकरारनामा ) में क्या फर्क है
सेल डीड और गिफ्ट डीड में सिर्फ एक फर्क है, जो की बहुत बड़ा फर्क है, और वह यह फर्क है की, सेल डीड में संपत्ति के हस्तांतरण करते समय एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को अपने अधिकार ट्रांसफर करता है,और उसके बदले में पैसे प्राप्त करता है, वही गिफ्ट डीड में एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को अपने अधिकार ट्रांसफर करता है,लेकिन इसके बदले में किसी भी तरह का कोई पैसा प्राप्त नहीं करता.
Gift deed में संपत्ति का हस्तांतरण कैसे होता है
गिफ्ट डीड ज्यादातर पारिवारिक व्यक्तियों के बीच होती है, जैसे भाई भाई को करता है, या बहन भाई को करती है, या सास बहू को करती है, या मां बेटे को करती है.
Gift deed में स्टांप ड्यूटी कितनी लगती है
संपत्ति के इस तरीके से ट्रांसफर करने में स्टांप ड्यूटी नाम मात्र लगती है, और अगर पारिवारिक रिश्ता हो या ब्लड रिलेशन हो तो उसमें बिलकुल नहीं लगती. कुछ प्रोसेसिंग फीस जरूर लग सकती है और यह अलग-अलग राज्य में अलग-अलग हो सकती है.
4.फैमिली सेटेलमेंट डीड ( Family settlement deed ) के द्वारा संपत्ति का हस्तांतरण

फैमिली सेटेलमेंट डीड के द्वारा संपत्ति का हस्तांतरण अक्सर पारिवारिक या पुश्तैनी संपत्ति के बंटवारे के तौर पर किया जाता है.
अक्सर कई बार पारिवारिक संपत्ति के मैटर को लेकर परिवार के सदस्य कोर्ट चले जाते हैं,तब कोर्ट यह कहता है कि परिवार के सभी सदस्य मिलकर आपस में सर्व सम्मति से यह आपस में तय कर लें कि, उस संपत्ति का कौन सा हिस्सा और कितना हिस्सा परिवार के किस व्यक्ति को मिलेगा,कोर्ट इस प्रकार के किए गए बंटवारे को सेटेलमेंट डीड के तौर पर सबके नाम से अलग-अलग कर देता है, और इस प्रकार से किया गया बटवारा फैमिली सेटलमेंट डीड कहलाता है.
फैमिली सेटेलमेंट डीड ( Family settlement deed ) me स्टांप ड्यूटी कितनी लगती है

फैमिली सेटेलमेंट डीड में किसी भी तरह की कोई स्टैंप ड्यूटी नहीं देनी पड़ती, और इसमें किसी भी तरह का कोई बड़ा खर्च नहीं उठाना पड़ता.
5.Will ( वसीयत ) के द्वारा संपत्ति का हस्तांतरण
विल यानी वसीयत के द्वारा संपत्ति का स्थानांतरण करने पर भी स्टैंप ड्यूटी को बचाया जा सकता है.
कोई व्यक्ति अपने जीते जी अपनी संपत्ति को किसी भी व्यक्ति के नाम से बिल यानि वसीयत करता है,तो उस व्यक्ति के जिंदा रहने तक वह संपत्ति उसी व्यक्ति की कहलाती है,और उस संपत्ति पर वही मालिक होता है. लेकिन उसके मरणोपरांत वह संपत्ति जो उसने वसीयत की थी, उस व्यक्ति को मिल जाती है,जिस व्यक्ति के नाम से उसने वसीयत की थी.लेकिन इस तरीके में संपत्ति का हस्तांतरण एक व्यक्ति के मरणोपरांत ही हो सकता है.
वसीयत से संपत्ति हस्तांतरण में स्टांप ड्यूटी कितनी लगती है
वसीयत को वह व्यक्ति अपने नाम से एग्जीक्यूट या प्रोबेट (probet ) करवा सकता है, और इसमें किसी भी तरह की कोई स्टैंप ड्यूटी उसको पे नहीं करनी पड़ती.इसमें कुछ नाम मात्र की प्रोसेसिंग फीस जरूर लग सकती है.
6.पॉवर ऑफ़ अटॉर्नी ( Power of attorney ) के जरिए संपत्ति का हस्तांतरण
पावर ऑफ अटॉर्नी से संपत्ति का हस्तांतरण ज्यादातर ऐसे एरिया में होता है जहां पर संपत्ति की रजिस्ट्री पर बैन लगा हो या, किसी भी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री नहीं हो सकती हो.
ऐसी जगह पर ज्यादातर लोग संपत्ति का हस्तांतरण पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए ही करते हैं, लेकिन यह तरीका लीगल रूप से सही नहीं है, और समय-समय पर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी इसके लिए कुछ दिशा निर्देश तय किए हैं.
पॉवर ऑफ़ अटॉर्नी में कितनी स्टांप ड्यूटी लगती है
पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए संपत्ति के हस्तांतरण में स्टांप ड्यूटी नहीं लगती, इसलिए ज्यादातर इन्वेस्टर और प्रॉपर्टी के फील्ड में काम करने वाले व्यक्ति इस संपत्ति के हस्तांतरण के तरीके को काम में लेते हैं.
संपत्ति के इस तरीके में एक बहुत बड़ा खतरा और रिस्क भी है, और वह यह है कि पावर ऑफ अटॉर्नी जारी करने वाला व्यक्ति अपने जीवन काल में कभी भी उस पावर ऑफ अटॉर्नी को निरस्त कर सकता है.
निष्कर्ष
इस प्रकार से संपत्ति के हस्तांतरण के यह तरीके हैं और आपको यह पता लग गया होगा कि कौन से तरीके में कितनी स्टैंप ड्यूटी लगती है, और कौन से तरीके में स्टांप ड्यूटी नहीं लगती, और कौन सा तरीका किस तरह से संपत्ति के स्थानांतरण में काम में लिया जा सकता है.
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