हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल ने पूरे राज्य में प्रॉपर्टी ट्रांसफर और पट्टे के लिए लगेगी 12 % स्टाम्प ड्यूटी को मंजूरी दी है.
हिमाचल प्रदेश सरकार ने संपत्ति हस्तांतरण और पट्टे पर संपत्ति की अनुज्ञा के लिए स्टांप ड्यूटी में बढ़ोतरी की है. इस बढ़ोतरी के तहत अब से प्रॉपर्टी ट्रांसफर और पट्टे के लिए लगेगी 12% स्टांप ड्यूटी, इस राज्य में लागू हुए नए नियम यानी के संपत्ति हस्तांतरण और पट्टे पर संपत्ति की अनुज्ञा पर 12% स्टांप ड्यूटी लागू की जाएगी.
हिमाचल में अब संपत्ति हस्तांतरण, पट्टे संपत्ति की अनुज्ञा पर अब 12 फीसदी स्टांप ड्यूटी देनी होगी। इसके लिए अध्यादेश जारी कर दिया गया है। इस अध्यादेश का संक्षिप्त नाम भारतीय स्टांप (हिमाचल प्रदेश संशोधन) अध्यादेश, 2025 है।
अध्यादेश के प्रावधान और उनका महत्व
इस अध्यादेश के तहत यदि राज्य सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश अभिघृति और भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118(2)(ज) के अंतर्गत किसी संपत्ति के हस्तांतरण की अनुज्ञा दी गई है, तो वहां पर स्टांप शुल्क बाजार मूल्य या प्रतिफल राशि जो भी अधिक हो, का 12 प्रतिशत की दर से प्रभारित की जाएगी. यह वृद्धि राज्य के राजस्व को बढ़ाने के साथ-साथ संपत्ति लेन-देन की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने की कोशिश का हिस्सा है.
संपत्ति पट्टे पर देने की शर्तें और स्टांप ड्यूटी
इसी अध्यादेश के तहत यदि राज्य सरकार ने किसी संपत्ति को पट्टे पर देने की अनुज्ञा दी है, तो उस पट्टे की संपूर्ण राशि या संपत्ति के बाजार मूल्य के अधीन संदत्त 12% दर से स्टांप ड्यूटी ली जाएगी.
हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल ने पूरे राज्य में प्रॉपर्टी ट्रांसफर और पट्टे के लिए लगेगी 12 % स्टाम्प ड्यूटी को मंजूरी दी है.

दस गुना बढ़ा दी स्टांप ड्यूटी, जनरल पावर ऑफ अटार्नी शुल्क के चुकाने होंगे 100 से 1000 रुपए
प्रॉपर्टी ट्रांसफर और पट्टे के लिए लगेगी 12% स्टांप ड्यूटी, इस राज्य में लागू हुए नए नियम पुरुषों को 50 लाख पर छह प्रतिशत और इससे अधिक की खरीद पर आठ प्रतिशत स्टांप ड्यूटी चुकानी पड़ेगी। इसके अलावा जनरल पावर आफ अटार्नी (जीपीए) शुल्क को 100 से 1000, 150 से 1500 और 200 से 2000 रुपए किया गया है।
न्यूनतम 1000 पर 5000 रुपए स्टांप ड्यूटी किया गया है। 100 की जगह 200 रुपए जीपीए करना तो सही होता, सरकार पांच प्रतिशत की वृद्धि करती तो उसे उचित माना जाता, लेकिन 100 को सीधे 1000 रुपए करना सही नहीं है। स्टांप ड्यूटी पर अधिक जानकारी के लिए आप हमारे YouTube channel को जरूर विजिट करें.
इससे पट्टेदारों पर आर्थिक भार बढ़ेगा, लेकिन इसका मकसद संपत्ति की वास्तविक कीमत को परिलक्षित करना और राज्य के राजस्व में योगदान देना है.
F&Q
स्टांप कितने रुपए का आता है?
मुख्य रूप से 100,और 500 के स्टांप कम में लिए जाते हैं.
स्टांप ड्यूटी की गणना कैसे की जाती है?
यदि संपत्ति नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में है तो संपत्ति के कुल बाजार मूल्य का 6% स्टांप ड्यूटी के रूप में आंका जाता है.
स्टांप शुल्क कौन लगाता है?
स्टाम्प शुल्क (stamp duty) एक प्रकार का कर है जो दस्तावेजों पर लगाया जाता है।यह राज्य सरकार द्वारा लगाया जाता हैं।
मकान की रजिस्ट्री में कितना खर्चा आता है?
राजस्थान की बात करें तो 8.8%पुरुष के लिए और लगभग 7.5% स्त्री के लिए स्टांप ड्यूटी लगती है.
स्टांप ड्यूटी का अर्थ क्या है?
स्टाम्प ड्यूटी एक ऐसा कर है जो राज्य सरकार द्वारा संपत्ति/संपत्ति के स्वामित्व की बिक्री पर लगाया जाता है.
स्टांप ड्यूटी क्यों लगाई जाती है?
स्टाम्प ड्यूटी एक कानूनी कर है जो पूरी तरह से देय है और किसी भी संपत्ति की बिक्री या खरीद के लिए सबूत के रूप में कार्य करता है.
कोर्ट फीस और स्टांप ड्यूटी में क्या अंतर है?
भारत में, स्टाम्प शुल्क को गैर-न्यायिक और न्यायिक के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। गैर-न्यायिक लागतों में स्टाम्प शुल्क शामिल है, जो सभी रियल एस्टेट लेनदेन पर समझौते के पूरे मूल्य पर एकमुश्त भुगतान के रूप में लगाया जाता है। इसके विपरीत, न्यायिक स्टाम्प शुल्क, या न्यायालय शुल्क, वे शुल्क हैं जो न्यायालय वादियों पर लगाता है.
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