अब प्रॉपर्टी खरीद में नहीं कर सकेंगे काले धन का इस्तेमाल: 2 लाख से ज्यादा का कैश लेनदेन तो कार्रवाई, आयकर विभाग को जानकारी देना जरूरी

अब प्रॉपर्टी खरीद में नहीं कर सकेंगे काले धन का इस्तेमाल: 2 लाख से ज्यादा का कैश लेनदेन तो
कार्रवाई, आयकर विभाग को जानकारी देना जरूर

अब प्रॉपर्टी खरीद में नहीं कर सकेंगे काले धन का इस्तेमाल, राजस्थान सरकार ने अब प्रॉपर्टी खरीदने या बेचने में काले धन के दुरुपयोग पर लगाम लगाने की तैयारी कर ली है.

माननीय सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक आदेश के बाद राजस्थान सरकार ने ऐसे सभी अवैध लेनदेन के खिलाफ एक्शन लेकर एक आदेश भी पारित कर दिया है. उसे आदेश की कॉपी आप देख सकते हैं.

अब प्रॉपर्टी खरीद में नहीं कर सकेंगे काले धन का इस्तेमाल: 2 लाख से ज्यादा का कैश लेनदेन तो कार्रवाई, आयकर विभाग को जानकारी देना जरूरी
अब प्रॉपर्टी खरीद में नहीं कर सकेंगे काले धन का इस्तेमाल: 2 लाख से ज्यादा का कैश लेनदेन तो
कार्रवाई, आयकर विभाग को जानकारी देना जरूरी

सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्या था

दरअसल, माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में यह कहा था कि अब किसी भी व्यक्ति, संस्था, अदालत या रजिस्ट्री विभाग द्वारा 2 लाख रुपए से ज्यादा का नकद लेनदेन करने पर इसकी जानकारी तुरंत आयकर विभाग को देनी होगी.

नियम तोड़ने पर क्या कार्रवाई हो सकती है

सरकार द्वारा बनाए गए इन नए नियमों को तोड़ने पर न सिर्फ संबंधित व्यक्ति बल्कि जिम्मेदार अधिकारी पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी.

नकद लेनदेन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की 2 मुख्य बातें

1. नकद लेनदेन की सीमा और सूचना का दायित्व: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अदालतों में जब भी किसी मुकदमे में 2 लाख या उससे अधिक की नकद

लेनदेन का दावा किया जाता है, तो संबंधित अदालत को अनिवार्य रूप से इसकी सूचना क्षेत्रीय आयकर विभाग को देनी होगी.

2. इसी तरह, संपत्ति के पंजीकरण के समय अगर दस्तावेज़ में इतनी बड़ी नकद राशि का उल्लेख है, तो उप पंजीयक को भी यह जानकारी आयकर विभाग को देनी होगी.

सूचना छिपाने पर सख्त कार्रवाई:

अगर कोई अधिकारी, चाहे वह अदालत में हो या रजिस्ट्रेशन विभाग में, इस तरह के लेनदेन की सूचनाछुपाता है और बाद में यह तथ्य सामने आता है, तो उस अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी.

यह मामला राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के मुख्य सचिव के संज्ञान में लाया जाएगा, जिससे अधिकारी की जवाबदेही और बढ़ जाएगी.

आयकर विभाग की भूमिका:

आयकर विभाग को जब भी इस तरह की सूचना मिलती है, चाहे वह अदालत, रजिस्ट्रेशन विभाग या अन्य किसी स्रोत से हो, तो विभाग को कानून के अनुसार जांच करनी होगी.

अगर पाया जाता है कि आयकर अधिनियम की धारा 269ST का उल्लंघन हुआ है, तो संबंधित व्यक्ति पर जितनी राशि नकद में ली गई है, उतने ही जुर्माने का प्रावधान है.

क्या था सरकार का एक्शन

राजस्थान सरकार ने 29 मई को एक महत्वपूर्ण सर्कुलर जारी कर प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री में होने वाली कर चोरी और काले धन के इस्तेमाल पर लगाम लगाने की पहल की है.

उसे सर्कुलर की कॉपी को आप यहां पर देख सकते हैं.

अब प्रॉपर्टी खरीद में नहीं कर सकेंगे काले धन का इस्तेमाल: 2 लाख से ज्यादा का कैश लेनदेन तो कार्रवाई, आयकर विभाग को जानकारी देना जरूरी
अब प्रॉपर्टी खरीद में नहीं कर सकेंगे काले धन का इस्तेमाल: 2 लाख से ज्यादा का कैश लेनदेन तो
कार्रवाई, आयकर विभाग को जानकारी देना जरूरी

सरकार का यह फैसला प्रॉपर्टी और रियल एस्टेट मार्केट में पारदर्शिता लाने का एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

इससे आने वाले समय में जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री में काले धन का इस्तेमाल और नकद लेनदेन पर रोक लग सकेगी.

नए नियमों से न सिर्फ सरकार को राजस्व की सही वसूली में मदद मिलेगी, बल्कि आम लोगों को भी प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री में होने वाली धोखाधड़ी से बचाया जा सकेगा.

किन अधिकारियों को क्या करना होगा अनिवार्य

सभी उप-रजिस्ट्रार,
पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग,
जिला कलेक्टर,
संभागीय आयुक्त,
तथा अन्य संबंधित अधिकारी

यह सभी अधिकारी मिलकर अब यह सुनिश्चित करेंगे कि सम्पत्ति पंजीकरण के समय प्रस्तुत दस्तावेजों की पूरी जांच हो.

स्टाम्प ड्यूटी और अन्य शुल्कों की सही वसूली के साथ नकद लेनदेन की सीमा का कड़ाई से पालन किया जाए.

यदि किसी दस्तावेज में निर्धारित सीमा से अधिक नकद लेनदेन का संज्ञान मिलता है, तो इसकी सूचना
अनिवार्य रूप से आयकर विभाग को देना होगी.

सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा ताकि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन न हो सके.

प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के लिए जरूरी नियम
अब प्रॉपर्टी खरीद में नहीं कर सकेंगे काले धन का इस्तेमाल: 2 लाख से ज्यादा का कैश लेनदेन तोकार्रवाई, आयकर विभाग को जानकारी देना जरूरी
अब प्रॉपर्टी खरीद में नहीं कर सकेंगे काले धन का इस्तेमाल: 2 लाख से ज्यादा का कैश लेनदेन तो कार्रवाई, आयकर विभाग को जानकारी देना जरूरी

राजस्थान स्टाम्प अधिनियम, 1998 के तहत प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के लिए स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान अनिवार्य कर दिया गया है.

अब लोगों की सुविधा के लिए स्टाम्प ड्यूटी के भुगतान के कई विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं.

  • पारंपरिक स्टाम्प
    ई-स्टाम्प
    डिमांड ड्राफ्ट
    ई-जीआरएएस

इन सभी माध्यम से भी स्टाम्प ड्यूटी जमा की जा सकती है.
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना वैध स्टाम्प शुल्क के किसी भी दस्तावेज का पंजीकरण नहीं किया जाएगा.

निष्कर्ष

सरकार का यह कदम प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री में पारदर्शिता लाने और राजस्व की सही वसूली सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा उठाया गया है.


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Mi Saiyad 23 Years Of Experience In Real Estate Sector. Enterpreneur, Consultant & Coach

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